मोहर्रम की दसवीं बुधवार को शहर व ग्रामीण अंचलों के कदीमी रास्तों पर जुलूस निकाला गया। अकीदतमंदों ने चिलबिला सहित अन्य स्थानाें पर करबला में ताजिया दफनाने के साथ ही फूलों को भी सुपुर्दे खाक किया। इस दौरान सुरक्षा के लिए कड़े इंतजाम किए गए थे। मकंद्रूगंज पुलिस चौकी से एसडीएम सदर शशि भूषण राय व सीओ सिटी शशी शेखर दीक्षित जुलूस पर नजर रखे हुए थे।
पैगंबरे इस्लाम के नवासे हजरत इमाम हुसैन और करबला के 72 साथियों की शहादत की याद में बुधवार को शान-ओ-शौकत के साथ खुशखुशवापुर से मोहर्रम का जुलूस निकला। जुलूस भंगवा चुंगी होते हुए पुराना माल गोदाम रोड पहुंचा। वहां पहले से ही तैयार अकीदतमंद अपने अलम, ताजिए और झांकियों के साथ जुलूस में शामिल हुए।
तहसील के रास्ते सभी पंजाबी मार्केट होते हुए श्रीराम तिराहा होकर चौक घंटाघर पहुंचे। शाही इमामबाड़े पर लोगों ने झंडा फहराया। आज के दिन लोगों ने रोजा रखा और खुदा की बारगाह में सजदा कर दुआ मांगी। अंधेरा होने से पहले ढोल ताशों के मातमी माहौल के बीच अंजुमन आशिकाने रसूल, अंजुमन रजा ए हुसैन, मोहर्रम कमेटी, शहीन अखाड़ा गोड़ें से निकला जुलूस करबला पहुंचा। जुलूस में डंका, अलम, नगाड़ा, ताजिया, दुलदुल घोड़े के साथ ही सबीहे भी शामिल रहे। देर शाम चिलबिला स्थित करबला में सैकड़ाें ताजिए और उसके फूल एहतराम के साथ दफनाए गए। इस दौरान लंगर में लोगों को खाना भी दिया जाता रहा, जिसे लेने के लिए हर कोई बेकरार था। जुलूस चौक पहुंचा तो हर कोई अपलक उसे निहारते दिखा। महिलाओं और बच्चों की भीड़ काफी देर तक डटी रही। जुलूस में करीब आधे किलोमीटर तक तिल रखने की जगह नहीं थी। इस मौके पर अध्यक्ष रज्जब अली, हाजी मिनहाज, इरशाद सिद्दीकी, हैदर अली, बरकत अली, मुहीब उल्ला, इख्तियार अली, शकील, अकबर, अफजल, कौशर समेत अन्य लोग मौजूद रहे।