प्रतापगढ़। शहर के साथ ही गांव में चल रहे कोचिंग संस्थान शिक्षा विभाग को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। रजिस्ट्रेशन तो उन्होंने कम छात्रों का कराया है लेकिन क्लास में छात्रों की संख्या ज्यादा है। कम छात्रों का रजिस्ट्रेशन यानी कम पैसे में ही उनका काम चल रहा है।
पूरे जिले में चल रहे कोचिंग संस्थानों ने शिक्षा विभाग के लोगों को घुमाकर रखा है। कितने ही कोचिंग संस्थान हैं जिनका रजिस्ट्रेशन सन 2002 से है। इसके बाद उन्होंने कभी रिन्यूवल ही नहीं कराया। कई संस्थान ऐसे हैं जो इस समय भारी छात्र संख्या के साथ संचालित हो रहे हैं। इसमेें जिन्होंने बाद में रिन्यूवल भी करा रखा है वह भी भारी छात्र संख्या के बावजूद रजिस्ट्रेशन कम छात्रों का करा रखा है। कुछ कोचिंग संस्थान विभागीय जांच से होशियार हैं। वे शिफ्टों में कोचिंग चलाते हैं। एक शिफ्ट में वह उतनी ही छात्र संख्या रखते हैं जितने का उन्होंने रजिस्ट्रेशन करा रखा है। इससे न तो उन्हें जांच का खतरा है और न ही उन्हें किसी का डर। कोचिंग संस्थानों ने बाकायदा इसके लिए विद्यालय की तरह क्लास बना रखी है। उसके लिए छात्रों से विद्यालयों की तरह बिल्डिंग, बिजली सहित तमाम खर्च लिए जाते हैं। कोचिंग संस्थान अगर अपने यहां के छात्रों की संख्या के अनुसार धनराशि जमा करें तो हर साल लाखों रुपये का फायदा विभाग को हो। जिले में इंटर कालेज 500 से अधिक हैं तो रजिस्टर्ड कोचिंग संस्थान 500 के करीब हैं। अगर देखा जाए तो लगभग इतने ही कोचिंग संस्थान बिना रजिस्ट्रेशन के ही चल रहे हैं।
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कितना है रजिस्ट्रेशन शुल्क
प्रतापगढ़। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में कोचिंग संस्थानों का रजिस्ट्रेशन होता है। यह तीन साल के लिए वैध माना जाता है। इसके बाद दोबारा उतना पैसा देकर रजिस्ट्रेशन कराना होता है। 10 बच्चों के रजिस्ट्रेशन पर 250, 20 तक 1000, 50 तक 5000, 100 तक 10000, 250 व इससे अधिक के लिए 25000 रुपये जमा करने होते हैं।