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हर मर्ज का एक इलाज रेफर

Sun, 11 Mar 2018 11:13 PM IST
प्रतापगढ़ ब्यूरो
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हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों को सरकारी अस्पतालों में ही इलाज कराने का निर्देश दिया है। जिले में करीब 35 हजार सरकारी कर्मचारी हैं, जिन्हें अब सरकारी अस्पतालों में ही इलाज कराना होगा, लेकिन सरकारी अस्पतालों की दशा बेहद खराब है। ग्रामीण इलाके के अस्पतालों में डाक्टर नहीं मिलते तो जिला अस्पताल में मर्ज गंभीर देखते ही डाक्टर रेफर कर देते हैं। एक तरफ जहां अत्याधुनिक मशीनें नहीं हैं तो अल्ट्रासाउंड भी पांच साल से बंद पड़ा है। सीटी स्कैन की भी व्यवस्था नहीं है।
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जनपद में लगभग 35 हजार सरकारी कर्मचारी हैं। जनपद के सरकारी अस्पतालों में इलाज की सही व्यवस्था न होने के कारण उन्हें प्राइवेट अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है। सीएचसी और पीएचसी की बात तो छोड़ दीजिए जिला पुरुष और महिला अस्पताल में विशेषज्ञ डाक्टरों के साथ संसाधनों का टोटा है। जांच की व्यवस्था नहीं है। दोनों अस्पताल में चिकित्सक से लेकर नर्स तक की कमी बनी हुई है। जिला अस्पताल में दस विशेषज्ञ चिकित्सक हैं। इनमें दो हड्टी के, तीन फिजीशियन, तीन सर्जन व दो बालरोग विशेषज्ञ हैं। 110 बेड का अस्पताल होने के बाद भी महज 14 नर्सों की तैनाती की गई है। एक नर्स को तीस से साठ बेड पर भर्तक मरीजों की देखरेख करनी पड़ रही है।

दो सर्जिकल के अलावा मेडिकल, इमरजेंसी, एसएनसीयू, पेइंग वार्ड, चिल्ड्रेन वार्ड के साथ प्राइवेट व बर्न वार्ड में नर्स समय से मरीजों के पास नहीं पहुंच पाती हैं। इसके चलते मरीज तड़पते रहते हैं। हार्निया, पथरी, ट्यूमर को छोड़ दिया जाए तो बाकी ऑपरेशन के लिए मरीजों को इलाहाबाद रेफर कर दिया जाता है। एसएनसीयू वार्ड का ताला कभी भी नहीं खुलता है। वेंटीलेटर की व्यवस्था आज तक नहीं की गई। ऐसे में जनपद के तीस हजार सरकारी कर्मचारियों का इलाज आसान नहीं होगा।
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