रानीगंज के मिर्जापुर चौहारी में जलता बुराई का प्रतीक रावण का पुतला।
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मिर्जापुर चौहारी गांव में संगीनों के साये में शनिवार को 20 साल बाद अन्याय व अधर्म के प्रतीक रावण का पुतला जलाया गया। भगवान श्रीराम का बाण लगते ही रावण धू-धू कर जल उठा। दो गांवों के बीच जमीन के विवाद के चलते दो दशक से रामलीला मंचन के बाद भी रावण नहीं जलाया जाता था। शनिवार को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में परंपरा का निर्वहन किया गया। भगवान श्रीराम के जयकारे से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा। हालांकि, गांव में कोरोना के चलते इस बार मेला नहीं लगा।
मिर्जापुर चौहारी व भागीपुर गांव में हर साल रामलीला का मंचन होता है। दोनों गांवों का मेला एक ही परिसर में लगता है। दोनों गांवों के बीच जमीन विवाद के चलते 20 साल से रामलीला मंचन के बाद भी रावण का दहन नहीं किया जाता था।
विधायक धीरज ओझा ने तहसील प्रशासन के साथ बैठक कर दोनों गांवों के बीच समझौता कराया। इस पर इस बार रावण जलाने की सहमति बनी। रामलीला मंचन खत्म होने के बाद शनिवार को रावण का पुतला जलाया जाना था। इसे लेकर प्रशासन पूरी तरह से चौकन्ना था।
मेला परिसर में शुक्रवार को शाम से पुलिसकर्मियों ने डेरा डाल दिया था। एक कंपनी पीएसी भी तैनात की गई। शनिवार को सुबह एसडीएम रानीगंज राहुल यादव, तहसीलदार श्रद्धा पांडेय, सीओ रानीगंज मेला परिसर पहुंचे। भीड़ रोकने के लिए पूरे परिसर की बैरिकेडिंग की गई।
शाम को 10 थानों की फोर्स तैनाती कर दी गई। शाम चार बजे भगवान श्रीराम ने बाण चलाया। इसके बाद रावण का पुतला धू- धू कर जलने लगा। इस दौरान पूरा इलाका जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा। विधायक धीरज ओझा, एसडीएम रानीगंज, सीओ अतुल अंजान, तहसीलदार सहित अफसरों ने भगवान राम की आरती उतारी।
भगवान श्रीराम का जीवन अनुकरणीय: धीरज
मिर्जापुर में रावण पुतला दहन के बाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि विधायक धीरज ओझा ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन अनुकरणीय है। उनका जीवन आदर्शों से भरा हुआ है। हम सभी को उनके जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। त्याग क्या होता है, इसे भगवान राम से सीखना चाहिए।