राशन कार्ड से बंगला, गाड़ी वाले अपात्रों का नाम हटाने और नए लाभार्थियों का चयन करने के बाद भी राशन नहीं मिल रहा है। कोटेदारों और पूर्ति निरीक्षकों के खेल में बेचारे लाभार्थी पिस रहे हैं। वह कभी कोटेदार तो कभी ब्लाक का चक्कर लगा रहे हैं।
सपा कार्यकाल में चयनित किए गए अपात्रों को खोजने के लिए जो जिला प्रशासन ने जो अभियान चलाया, उसमें 1,19,369 लाभार्थियों का नाम जहां बाहर किया गया, वहीं नए लाभार्थियों का नाम जोड़ा गया। विभाग ने नए लाभार्थियों का नाम सूची जोड़ते हुए राशनकार्ड भी जारी कर दिया।
मगर दुर्भाग्य यह रहा कि लगभग तीन माह का समय बीतने के बाद भी नए लाभार्थियों को राशन ही नहीं दिया जा रहा है। कोटेदार और पूर्ति निरीक्षक के खेल में बेचारे नए लाभार्थी पिस रहे हैं। विभाग का मानना है कि नए लाभार्थियों का राशन तभी आता है, जब कंप्यूटर में नाम फीड कराया जाता है।
जबकि वास्तविकता तो यह है कि विभाग संख्या के आधार पर राशन की डिमांड करता है। पुराने नाम हटाए गए, तो नए नाम जोड़े भी गए हैं। मगर इसकी कोई रिपोर्ट शासन को नहीं भेजी गई। इससे राशन पर आवंटन पर रोक ही नहीं लगी।
मगर विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से इसका भरपूर लाभ कोटेदार उठा रहे हैं। नए कार्डधारकों को कोटेदार यह कहकर गुमराह कर रहे हैं, कि अभी शासन से आपके लिए राशन का आवंटन ही नहीं हुआ है। इससे वह विभाग और ब्लाक का चक्कर लगा रहे हैं।
संबद्धता का जारी है खेल
जिला पूर्ति कार्यालय में कोटा संबद्ध करने का खेल चल रहा है। कोटा निलंबित करते ही अपने चहेते कोटेदारों के यहां दुकान संबद्ध करके मोटी रकम की कमाई की जा रही है। वर्तमान में जिले में 23 दुकानें दूसरे कोटेदारों से संबद्ध हैं। दरअसल में संबद्ध कोटा इतनी दूर बना दिया जाता है, कि गांव के लोग राशन लेने ही नहीं पहुंच पाते हैं। इससे दुकानदार बेचकर अफसर और कर्मचारी आपस में हिस्सा बांट लेते हैं।
नए लाभार्थियों के लिए राशन अभी नहीं आया है। मांगपत्र भेजा गया है, जल्द आते ही कोटेदारों को वितरण के लिए भेजा जाएगा। जो लाभार्थी अपात्र मिले थे, उनका राशन काट दिया गया है। फिलहाल परेशान होने की बात नहीं है, अगले माह से सभी लाभार्थियों को राशन वितरित किया जाएगा।
सुनील कुमार यादव, जिला पूर्ति अधिकारी