राशनकार्डों की सूरत जल्द ही बदलने वाली है। उपभोक्ताओं को अब पासबुक के आकार का राशनकार्ड नहीं मिलेगा, बल्कि एटीएम कार्ड की तरह राशनकार्ड मिलेगा। कोटेदारों की चोरी रोकने के लिए उन्हें हाईटेक किया जा रहा है। राशन की सभी दुकानें कंप्यूटरीकृत होंगी। उपभोक्ताओं को जो राशन वितरित किया जाएगा, उसे ऑनलाइन फीड करना होगा। इससे अधिकारी कहीं से भी यह देख सकेंगे कि उपभोक्ताओं को कितना राशन मिला।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन योजना के तहत चिह्नित 4.85 लाख लाभार्थियों को जल्द ही नया राशनकार्ड दिया जाएगा। सपा राज में अखिलेश सिंह यादव के फोटो वाले राशनकार्ड जल्द ही रद्द किए जाएंगे। शासन के नए फैसले के मुताबिक एटीएम कार्ड की भांति अब उपभोक्ताओं को राशनकार्ड दिए जाएंगे। इधर कोटेदारों की चोरी रोकने के लिए नई पहल की गई है। अब जिले के सभी कोटेदारों को कंप्यूटरीकृत किया जाएगा। सभी दुकानों पर लगने वाली स्वैप मशीन में नए राशनकार्ड को लगाकर उसका खाका देखा जाएगा और उपभोक्ता को कितना राशन दिया गया, इसका विवरण भी फीड करना होगा। कोटेदार ऑनलाइन फीडिंग में जो राशन उपभोक्ताओं के हिस्से में फीड करेंगे, उसे वह मुख्यालय से बैठकर देख सकेंगे। उपभोक्ताओं को वास्तव में राशन मिला है या नहीं, इसकी जानकारी करने के लिए वह मोबाइल पर फोन करके तहकीकात भी कर सकेंगे। अगर कोई कोटेदार गड़बड़ी करता है, तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
उपभोक्ताओं का जुटाया जाएगा मोबाइल नंबर
जिले के सभी उपभोक्ताओं का अब मोबाइल नंबर जुटाया जाएगा। राशनकार्ड में परिवार के मुखिया के साथ ही सदस्यों का नाम और मोबाइल नंबर अंकित रहेगा। राशनकार्ड पहचान के लिए एक संख्या भी एलाट की जाएगी।
कोड बताएगा तहसील की पहचान
उपभोक्ताओं को मिलने वाले राशनकार्ड के ऊपर कोड अंकित होगा। कोडवर्ड पढ़ने के बाद अधिकारियों को यह मालूम हो जाएगा कि किस तहसील का कार्ड है।
पहचान के लिए काम आएगा राशनकार्ड
राशनकार्ड का प्रयोग पहचान के रुप में होगा। परिवार के मुखिया की फोटो और नाम तो राशनकार्ड के ऊपर ही होगा, मगर अन्य परिवार के सदस्यों की जानकारी के लिए राशनकार्ड को कंप्यूटर में लगाना होगा।