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26 साल बाद बना उग्र संक्रांति का दुर्लभ संयोग

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Rare coincidence of fiery solstice after 26 years
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प्रतापगढ़। मकर संक्रांति पर इस बार दुर्लभ संयोग बन रहा है। ग्रहों व नक्षत्रों के अदभुत संयोग से 26 साल बाद उग्र संक्राति का अवसर बना है। जानकार बता रहे हैं कि इससे सुख समृद्धि में बढ़ोतरी के साथ ही राजनैतिक उतार-चढ़ाव भी देखने का मिलेंगे।
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माघ मास का दूसरा शाही स्नान मकर संक्रांति को होता है। इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। जिसे बहुत ही शुभ माना जाता है। मान्यता है कि सूर्य के मकर राशि में प्रवेश से जितनी भी नकारात्मकता होती है, वह नष्ट हो जाती है। दान-पुण्य के लिहाज से भी इसे महत्वपूर्ण माना जाता है। पंडित आलोक मिश्र ने बताया कि इस बार उग्र संक्रांति का दुर्लभ संयोग बन रहा है। ग्रहों व नक्षत्रों का यह संयोग करीब 26 साल बाद आ रहा है। इस बार सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर तुला लग्न व उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र है। ग्रहों व नक्षत्रों का यह संयोग सुख-समृद्धि का द्योतक है। इसमें धार्मिक कार्य करने से बहुत लाभ मिलता है सुख-समृद्धि की वृद्धि होती है। इसके अलावा राजनैतिक उतार-चढ़ाव भी देखने को मिलेंगे।
क्या करें दान
तिल का दान करें, गुड़ व तिल युक्त समाग्री दान करें, खिचड़ी भी दान करने का भी विधान है। इन वस्तुओं के दान से बहुत लाभ मिलता है।
लगाएं पुण्य की डुबकी
आमतौर पर मकर संक्रांति पर लोग गंगा स्नान करते हैं। इस दिन नदियों में स्नान करना बहुत महत्व रखता है। इस बार उग्र संक्रांति का संयोग बनने से यह और भी लाभप्रद है।
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