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मंथरा के बुने जाल में फंस गई कैकेयी

Thu, 06 Oct 2016 11:33 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़।
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न्‍यूूज
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कुल की रीति निभाने के चक्कर में राजा दशरथ रानी कैकेयी के मोहपाश में फंस गए। मंथरा के कान भरने के बाद कोप भवन में कैकेयी को समझाने पहुंचे दशरथ ने अपने दो वरदान को याद कर उनको पूरा करने का वादा कर लिया। अपनी चाल में सफल हो जाने के बाद कैकेयी फूले नहीं समां रही थीं। जबकि दशरथ को शायद यह नहीं मालूम कि छल हुआ है। कैकेयी उनसे जो वरदान मांगने वाली है उससे उनके होश उड़ जाएंगे। राजा दशरथ कोप भवन में कैकेयी को मनाने के लिए पहुंचे। यह नाट्य सीन छठे दिन श्रीरामलीला समिति की ओर से निकली झांकी में कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किया गया। इसको देखने के लिए सड़काें के किनारे भीड़ जमा रही।
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राम विवाह के बाद राम के राज्याभिषेक को लेकर एक तरफ अयोध्या राजमहल और नगर में धूमधाम मची हुई। आनंदिर होकर स्त्री पुरुष मंगलचार के साज सज रहे हैं। राजद्वार पर बड़ी भीड़ है। मगर राजमहल के अंदर मंथरा दूसरी ही चाल चल रही थी। उसने रानी कैकेयी को भरत को राजगद्दी के लिए भड़काया। उसकी कपटी और चाल भरी बातों में आकर कैकेयी कोप भवन में चली गईं। कोप भजन पहुंचे राजा दशरथ ने कैकेयी से कहा रघुकुल रीति सदा चलि आई। प्राण जाय पर वचन न जाई।। मांगों जो मांगना है।

 राजा दशरथ कभी भी अपने वचन से पीछे नहीं हटेंगे। कैकेयी ने राम को चौदह वर्ष का वनवास और भरत को राजगद्दी का वरदान मांगा तो जैसे भूचाल आ गया। राजा दशरथ पर मानों बिजली गिर पड़ी हो। यह बात राजमहल में फैल गई। नगर में शोक छा गया। इस झांकी के साथ दूसरी कलात्मक झांकी शोभायात्रा में चार चांद लगा रही थी। झांकी को देखने के लिये लोग छतों पर खड़े थे। जगह-जगह झांकी का स्वागत किया गया।
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