ठंड में कोहरे के दौरान रेलवे लाइन की मरम्मत करने वाले गैंगमैन भयमुक्त होकर काम कर सकेंगे। विभाग की ओर से रक्षक उनका कवच बनेगा। विभाग की ओर से उन्हें रक्षक डिवाइस देने की तैयारी है। ट्रेन के आने की खबर डिवाइस के माध्यम से गैंगमैनों को पहले ही पता हो जाएगी। इससे वे समय रहते ट्रैक से दूर हो जाएंगे।
रेलवे के सुरक्षा व संरक्षा विभाग में तैनात ट्रैकमैन और गैंगमैन अपनी जान जोखिम में डालकर ड्यूटी करते हैं। कोहरे के दिनों में ट्रेन जब तक नजदीक नहीं आ जाती, तब तक गैंगमैन को भनक नहीं लगती। इससे वे ट्रेन की चपेट में आ जाते हैं। कभी कभार पटरी पूरी तरह से तैयार न होने के कारण रेल डिरेल का खतरा बना रहता है। इन सब से निपटने के लिए रेल विभाग की ओर से गैंगमैन और ट्रैकमैन को डिवाइस देने का फैसला लिया है।
इससे कोहरे के दिनों में जहां ट्रैक मरम्मत करने के दौरान होने वाले हादसे पर काबू पाया जा सकेगा। वहीं किसी की जान पर खतरा नहीं पैदा हो सकेगा। दरअसल रेल विभाग अब ट्रैकमैन और गैंगमैन को रक्षक डिवाइस उपलब्ध कराने जा रहा है। जो ट्रेेनों के दो किमी दूरी पर ही गैंगमैन को सतर्क कर देगा और वे समय रहते ट्रैक से दूर हो जाएंगे।
रेलवे के अफसरों का कहना है कि दक्षिण मध्य रेलवे में डिवाइस का प्रयोग किया जा रहा है। दक्षिण मध्य रेलवे में होने वाले हादसे में रेल डिवाइस रोक लगा रहा है। इससे इस क्षेत्र के गैंगमैन बगैर डर और भय के रात हो या फिर कोहरे के दिनों में ट्रैक मरम्मत करते हैं। एक डिवाइस पर 80 हजार रुपये का खर्च आ रहा है। उत्तर रेलवे में ढाई हजार तो प्रतापगढ़ में 75 रेलवे डिवाइस मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
रेलवे के अफसर बताते हैं कि रेल डिवाइस वॉकी टॉकी की तरह होती है। जो गैंगमैनों को दी जाती है। आने-जाने वाली ट्रेनों की सूचनाएं लगातार प्रसारित होती रहती हैं। इसमें एलईडी इंडीकेशन ऑडिबल बजर व वाइब्रेशन सेट है। जिसके चलते जिस स्थान पर वे खड़े हैं वहां से दो किमी पहले ट्रेनों के आने और जाने की सूचनाएं गैंगमैन को मिलती रहेगी।
रेलवे डिवाइस मशीन की मांग की गई है। उम्मीद लगाई जा रही है कि कोहरा पड़ने की शुरूआत होने के पहले डिवाइस मशीन मिल जाएगा। जैसे ही मिलेगा तत्काल उसे गैंगमैनों को दे दिया जाएगा।
निहालुद्दीन,एडीएन।