बेमौसम बरसात के मारे बेचारे किसान हलाकान हैं। मौसम की मार का असर किसानों पर जहां आफत बनकर टूटा है वहीं बेमौसम बरसात से मवेशी भी भूख से तड़पेंगे। गेहूं की पैदावार के साथ ही भूसा भी कम निकल रहा है। इससे किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
मौसम विभाग की मानें तो लगभग बीस वर्ष पहले इस कदर बेमौसम बरसात हुई थी। इसके असर से किसानों की फसल बर्बाद हो गई थी। इसे याद कर बुजुर्ग किसान आज भी सिहर उठते हैं। यहां तक कि खेतों में ही सरसों, मटर और गेहूं के बीज तक अंकुरित हो गए थे। कमोवेश मौसम का यही हाल इस बार भी देखने को मिल रहा है। अभी जनपद में एक तिहाई गेहूं की फसल की किसान मढ़ाई कर सके हैं लेकिन एक दिन धूप तो दूसरे दिन बारिश से किसानी पर संकट छाया हुआ है। किसान अपने पसीने की कमाई को अपने घरों की बखार में नहीं समेट पा रहे हैं। सदर विकासखंड के पूर्व प्रधान राजेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि मौसम ने किसानों को बर्बाद करके रख दिया है।
गेहूं की फसल तैयार होने के बाद भी बारिश से भीगने के कारण घरों की बखार तक नहीं पहुंच पा रही है। कादीपुर के कृषक खुर्शीद अहमद की मानें तो इस बार गेहूं की पैदावार के साथ भूसा भी कम निकला है। पशुपालक भंगवा निवासी प्रमोद कुमार दुबे ने बताया कि बेमौसम बारिश का असर किसानों के साथ पशुपालकों पर भी पड़ेगा। एक माह पहले तक भूसा नौ सौ रुपए क्विंटल तक बिका। इस बार भी भूसे का रेट उतरने वाला नहीं है बल्कि हजार रुपए से अधिक होने की संभावना बन रही है। इस बार भूसा कम निकल रहा है। ऐसे में जनपद की बाजार में कम भूसा बिकेगा। बाहर से आने भूसा मनमानी दाम में ही बिकेगा। ऐसे में पशुपालक अपने मवेशियों को पालने के लिए दुधारू जानवरों को ही पूरा चारा देंगे। दूसरे जानवरों को काम चलाऊ चारा दिया जाएगा।