जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों को आराम करने के लिए कहीं प्रतीक्षालय नहीं बनाया गया है। ऐसे में मरीज के साथ अस्पताल में आने वाले तीमारदारों को खुले आसमान के नीचे या फिर चाय-पान की दुकानों पर बैठना पड़ रहा है। कुछ तो मरीजों के बेड पर ही आराम करने लगते हैं। चार सौ बेड का जिला अस्पताल बना हुआ है। रोजाना तीन सौ से अधिक मरीजों की ओपीडी होती है। मगर, यहां मरीजों के साथ आने वाले तीमारदारों को बैठने के लिए कहीं प्रतीक्षालय नहीं बनाया गया है। ऐसे में ओपीडी के साथ वार्ड में भर्ती मरीजों के तीमारदारों को खुले में बैठना पड़ता है। गर्मी के चलते वे परेशान हो जाते हैं।
कुछ तीमारदार भर्ती मरीजों के बेड या फिर उनकी खाट के नीचे चादर बिछाकर आराम करने लगते हैं। ऐसे में वे जोर-जोर बात करते हैं तो मरीजों को दिक्कतें होती हैं। स्वास्थ्य विभाग उन्हें हटा भी नहीं पाता है। कारण यह है कि अगर मरीज के साथ आए तीमारदार को वार्ड से बाहर कर दिया जाए तो उनके साथ होने वाली समस्या को स्टाफ नर्स तक पहुंचाने वाला कोई नहीं बचेगा। 70 बेड पर भर्ती मरीजों की देखरेख की जिम्मेदारी एक स्टाप नर्स को दी गई है। वह समय से किसी के पास नहीं पहुंच पाती है।
निरीक्षण के दौरान वार्ड से हटा दिए जाते हैं तीमारदार
जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों के तीमारदारों को उस समय वार्ड से हटाया जाता है जब जिलाधिकारी या फिर बाहर से बड़े अधिकारी निरीक्षण के लिए आते हैं। खबर लगते ही स्टाप नर्स मरीजों को छोड़कर उनके तीमारदारों को वार्ड से बाहर निकल देती हैं। ऐसे में मरीजों को दिक्कतें होती हैं।
रेंग रहा है बीटीसीटी वार्ड का पंखा
जिला अस्पताल में बर्न वार्ड के बगल बीटीसीटी वार्ड बना हुआ है। यह वार्ड वैसे बर्न के मरीजों को रखने के लिए बना हुआ है मगर, जिम्मेदार अधिकारी यहां ऑपरेशन के बाद मरीज को भर्ती करके इलाज करते हैं। इस वार्ड में मात्र एक पंखा लगा हुआ है। वह भी रेंगता रहता है। इससे इस वार्ड में भर्ती मरीज गर्मी से परेशान हो जाते हैं।