गार्ड के इंतजार में वाराणसी से लखनऊ जाने वाली वीएल पैसेंजर गुुरुवार को करीब एक घंटे रेलवेे स्टेशन पर खड़ी कर दी गई। नाराज यात्रियों ने स्टेशन पर हंगामा करना शुरू कर दिया। लोग एसएम कार्यालय तक शिकायत करने पहुंच गये। दूसरे गार्ड को भेजकर ट्रेन चलवाई गई। तब जाकर यात्री माने। इसमें ड्यूटी लगाने वाले कर्मचारी की लापरवाही सामने आई है।
सूत्रों की मानें तो वीएल पैसेंजर में जिस गार्ड की ड्यूटी थी वह किसी कारण से नहीं आ सका। रोस्टर पर ड्यूटी लगाने वाले उसकी जगह पीआरएल के गार्ड की ड्यूटी लगा दी और उसको इसकी सूचना भी देने की जरूरत नहीं समझी। ड्यूटी लगाकर लोग आराम से बैठ गये। इधर गाड़ी का चालक बार-बार हार्न बजाकर गार्ड से चलने की परमिशन मांग रहा था। इस चक्कर में करीब एक घंटे का वक्त बीत गया। गार्ड न होने की जानकारी जब यात्रियों को हुई तो वे हंगामा करने लगे।
जब इसकी सूचना एसएम कार्यालय को मिली तो आनन-फानन में दूसरे गार्ड की व्यवस्था करनी पड़ी। कोई गार्ड जाने को तैयार नहीं हुआ। बड़ी मुश्किल से गार्ड एके विश्वकर्मा को लोग तैयार कर पाये। उनको वीएल से भेजा गया। डिप्टी एसएस एपी उपाध्याय ने बताया कि वीएल में एके पांडेय गार्ड की ड्यूटी थी। किन्हीं कारणों से वे नहीं आ पाये तो पीआरएल के गार्ड आरएन सरोज की ड्यूटी टीएलसी ने लगाई। मगर इसकी सूचना गार्ड को नहीं दी गई। जरा सी चूक की वजह से ट्रेन थोड़ी लेट जरूर हुई है। उधर, ट्रेन की लेटलतीफी को लेकर कंट्रोल ने इसका जवाब मांगा है। लोकल यात्रियों का आरोप है कि आये दिन इस तरह की लापरवाही हो रही है। गार्ड अक्सर विलंब से आते हैं। जिसके कारण ट्रेन तो लेट होती ही है यात्रियों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है। रेलवे सूत्रों के अनुसार गार्ड को आधा घंटे पहले स्टेशन पर आ जाना चाहिए। ताकि वे ड्यूटी रोस्टर के साथ रूट चार्ट और जरूरत के समान की जांच पड़ताल कर सके। ताकि रास्ते में कोई दिक्कत न आये जिसका असर ट्रेन के संचालन पर पड़े। मगर गार्ड ऐसा न करके ट्रेन छूटने के वक्त पहुंच रहे हैं।