प्रतापगढ़ और चिलबिला रेलवे स्टेशन के फुट ओवरब्रिज के कायाकल्प का इंतजार खत्म हो गया है। रेलवे ने दोनों पुलों के निर्माण के लिए डेढ़ करोड़ रुपये स्वीकृत कर दिए हैं। इसी के साथ ही स्टेशन के बाहर दोनों साइड पर बनने वाले वेलकम गेट और सरकुलेटिंग एरिया के विस्तारीकरण के लिए भी दो करोड़ की धनराशि अवमुक्त कर दी गई है। शीघ्र ही स्टेशन के कायाकल्प का काम शुरू हो जाएगा। अरसे से सौंदर्यीकरण की प्रतीक्षा कर रहे प्रतापगढ़ रेलवे स्टेशन और परिसर के कायाकल्प का इंतजार खत्म होने को है। मोदी सरकार में रेलवे स्टेशनों के कायाकल्प के काम में तेजी लाई जा रही है। प्रतापगढ़ रेलवे स्टेशन का कायाकल्प भी उसी का हिस्सा है। पुराने समय के इस स्टेशन पर वर्षों बाद कुछ नया होने जा रहा है।
वैसे तो स्टेशन पर जरूरत की सुविधाओं जैसे बिजली, पानी, शौचालय, प्लेटफार्म की समस्या आज भी बनी हुई है। इनकी तरफ रेल प्रशासन का ध्यान अभी भी नहीं जा रहा है। जिससे यात्रियों को काफी दिक्कतें आ रही हैं। सांसद हरिवंश सिंह ने डीआरएम और अन्य अधिकारियों के साथ बैठक कर उन्होंने स्टेशन के विकास का मुद्दा उठाया था। प्रतापगढ़ रेलवे स्टेशन पर प्लेटफार्म पर आने-जाने के लिये वैसे तो दो ब्रिज हैं। एक ब्रिज जो कि आजादी के समय की याद दिलाता है अब कमजोर हो गया है। अधिक भीड़ होने पर पुल हिलता है। दूसरा ब्रिज नया बना है, मगर उसका उपयोग बहुत कम हो पा रहा है। चिलबिला जंक्शन के पुल की भी स्थिति इससे मिलती जुलती है। जर्जर होने के कारण यात्री इस पर जाने से घबराते हैं। हालांकि इसका नवीनीकरण किया गया था। मगर जो भी काम हुआ वह टिकाऊ नहीं हुआ। रेलवे ने दोनों स्टेशनों के ब्रिज के निर्माण के लिये डेढ़ करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत कर दी है। स्टेशन का सरकुलेटिंग एरिया भी पुराने समय का ही है। इसका भी कायाकल्प होने जा रहा है। दोनाें ओर वेलकम गेट बनेगा। पार्क के साथ साइकिल स्टैंड व अन्य सुविधाओं का भी विस्तार किया जायेगा। इस काम के लिये दो करोड़ की धनराशि मिली है।