शिवगढ़ ब्लॉक के केवरा कला गांव की रागिनी मौर्या ने मधुमक्खी पालन के व्यवसाय से आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। उन्होंने स्वयं सहायता समूह के माध्यम से यह सफलता हासिल की है। रागिनी अब अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने का संदेश दे रही हैं।
रागिनी ने सात वर्ष पहले उद्यान विभाग से प्रयागराज में मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण लिया था। उन्होंने दस हजार रुपये की लागत से अपना व्यवसाय शुरू किया। शुरुआत में उनके पास मधुमक्खी के केवल दो परिवार थे। व्यवसाय बढ़ाने के लिए उन्हें पूंजी की कमी महसूस हुई। इसके बाद उन्होंने ज्योति आजीविका स्वयं सहायता समूह का गठन किया। समूह से 50 हजार रुपये का ऋण लेकर उन्होंने कारोबार बढ़ाया। आज उनके पास मधुमक्खी के 150 परिवार हैं।
महिलाओं को रोजगार से जोड़ने का प्रयास
रागिनी मौर्या ज्योति आजीविका स्वयं सहायता समूह की सचिव हैं। उनका कहना है कि वे उत्पादन समूह के माध्यम से काम कर रही हैं। उनका लक्ष्य समूह और गांव की महिलाओं को रोजगार से जोड़ना है। वे सभी को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास कर रही हैं।