जिले के किसानों के लिए राहत भरी खबर है। जिले में 15 अप्रैल से गेहूं की खरीद प्रारंभ हो रही है। इस वर्ष कोरोना के चलते जिले में क्रय केंद्रों की संख्या जहां घट गई है, वहीं रजिस्ट्रेशन कराने वाले किसान भी कम हो गए हैं। इससे गेहूं खरीद पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
किसानों को गेहूं की उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए जिले में 35 क्रय केंद्र खोले गए हैं। कोरोना के संक्रमण के चलते जहां इस वर्ष क्रय केंद्रों की संख्या घट गई है, वहीं रजिस्ट्रेशन कराने वाले किसान भी कम हो गए हैं। पिछले वर्ष गेहूं की खरीद करने के लिए 48 केंद्र बनाए गए थे, मगर इस वर्ष अभी 35 केंद्रों को ही मंजूरी मिली है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि सात केंद्र और खोलने पर विचार किया जा रहा है। 1925 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिकने वाले गेहूं को बेचने के लिए अभी तक मात्र 396 किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। जबकि पिछले वर्ष पंजीकरण कराने वाले किसानों की संख्या हजारों में थी।
15 अप्रैल से होने वाली खरीद के लिए सभी केंद्रों को कांटा, बाट, बोरी के साथ ही सैनिटाइजर, साबुन, पानी की व्यवस्था करने को कहा गया है। दरअसल, कोरोना के संक्रमण से बचाव के लिए जिले में लॉकडाउन होने और पांच इलाकों को हॉटस्पॉट घोषित करने से किसान घर से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। ऐेसे में वह अपना रजिस्ट्रेशन कैसे कराएं।
मौसम की बेरुखी देखकर गेहूं की फसल को घर लाने के लिए रात-दिन एक कर दिए हैं। हार्वेस्टर, ट्रैक्टर से फसल की कटाई और मड़ाई में इन दिनों व्यस्त हैं। मौसम में आने वाले उतार-चढ़ाव से बचने के लिए फसल को घर लाने के लिए पूरी ताकत झोंक दिए हैं।
लॉकडाउन के चलते शहर से गांव तक साइबर कैफे पर ताला लटक रहा है। ऐसे में किसान आनलाइन पंजीकरण कैसे कराएं। ऐसा लगता है कि लॉकडाउन के समाप्त होते ही रजिस्ट्रेशन कराने वाले किसानों की संख्या में इजाफा होगा।
15 अप्रैल से सभी गेहूं क्रय केंद्र खोलने का आदेश दिया गया है। केंद्रों पर गेहूं खरीदने के लिए इलेक्ट्रॉनिक कांटा, बोरी की व्यवस्था के साथ ही किसानों के हाथ धुलने के लिए साबुन, सैनिटाइजर की व्यवस्था करने को कहा गया है। अगर कोई लापरवाही करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
धनंजय प्रताप सिंह, जिला विपणन अधिकारी