जिले में मंगलवार को चुनावी रैली में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री मोदी पर सियासी बाण छोड़े। पीएम के बिजली देने में भेदभाव करने के आरोप को लेकर अखिलेश ने सवाल किया, मोदीजी! गंगा मइया की कसम खाकर बताओ कि बिजली दी की नहीं दी। उन्होंने कहा कि कई बार प्रधानमंत्री से यह पूछ चुका हूं, लेकिन अभी तक जवाब नहीं मिला। प्रधानमंत्री के नोटबंदी के फैसले को गलत बताते हुए अखिलेश ने कहा कि रुपया काला नहीं होता, लेन-देन काला होता है। नोटबंदी कर पूरे देश को मोदी ने लाइन में लगा दिया। कई मौतें हुईं। केंद्र की सरकार ने उनके परिवारों के बारे में पूछा तक नहीं। हमने सभी परिवारों को दो-दो लाख मुआवजा दिया। नोटबंदी के दौरान लाइन में एक बच्चा भी पैदा हुआ। बैंकवालों ने उसका नाम खजांची रखवा दिया। जब उसके परिवार के बारे में पता कराया तो मालूम हुआ कि वह मोहल्ले का सबसे गरीब परिवार है। उस परिवार को भी दो लाख रुपये की मदद दी गई। भाजपा ने काला धन लाकर हर व्यक्ति के खाते में 15-15 लाख रुपये देने का वादा किया था, लेकिन फूटी कौड़ी भी नहीं दी।
शहर के केपी कालेज मैदान में आयोजित जनसभा में कांग्रेस से गठबंधन के सवाल पर सीएम ने कहा कि पहले अकेले चलने से साइकिल डगमगाती थी, लेकिन अब तो हाथ का साथ मिल गया है। ऐसे में साइकिल पूरी रफ्तार से दौड़ रही है। अखिलेश ने ऐलान किया कि सरकार बनने पर महिलाओं को प्रेशर कुकर दिया जाएगा। समाजवादी पेंशन पांच सौ से बढ़ाकर एक हजार कर दी जाएगी। शहर-गांवों को 24 घंटे बिजली दी जाएगी। गरीबों का राशन हर हाल में उन तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। सरकारी स्कूलों में पढ़ाई ठीक न होने की बात स्वीकार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि झोला दे दिया, खाना दे दिया। दूध और घी देंगे। सरकारी बनी तो पढ़ाई के साथ बच्चों की सेहत सुधारने पर पूरा जोर होगा।
अखिलेश सिर्फ भाजपा और मोदी पर ही हमलावर रहे। कहा कि ढाई साल से ज्यादा वक्त बीत गया, लेकिन अभी तक अच्छे दिन नहीं दिखे। प्रधानमंत्री और भाजपा के लोग डिजिटल इंडिया की बात करते हैं, लेकिन आज तक किसी को लैपटॉप तक नहीं दिया। हमने उनके कहने से पहले ही लोगों को लैपटाप बांट दिए। अखिलेश ने कहा कि प्रत्याशियों से कुछ गलतियां जरूर हुई होंगी, लेकिन यह मेरा भी चुनाव है। समाजवादियों का इम्तहान है। कहा कि हमने प्रचार और विज्ञापन के लिए ‘काम बोलता है’ का नारा दिया तो विपक्षियों ने इसे ही मुद्दा बना लिया। उन्हें नारे से ही चिंता हो गई है। केपी कालेज के ग्राउंड में जनसभा के दौरान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सिर्फ भाजपा और मोदी पर ही हमलावर रहे। पूरे भाषण के दौरान एक बार भी उन्होंने बसपा सुप्रीमो मायावती का नाम नहीं लिया। उन्होंने अपना भाषण खत्म कर लोगों को धन्यवाद दे दिया। इस बीच मंच पर खड़े नेताओं से गुफ्तगू के बाद अखिलेश ने दोबारा माइक पकड़ा। बसपा में रहे एक नेता के सपा में आने का स्वागत करते हुए कहा कि एक बात मैं भूल गया। ये नेता बुआजी को छोड़कर हमारे साथ आ गए हैं। पत्थर वाली सरकार याद है ना। बुआजी हमारे गठबंधन पर तंज कस रही हैं, लेकिन वह कभी भी भाजपा से हाथ मिला सकती हैं। भाजपा के लोग उनसे पहले ही तीन बार रक्षाबंधन मना चुके हैं।