कर्जमाफी को लेकर उत्साहित किसानों को योगी सरकार का एक और झटका लगा है। अब ऐसे किसानों का कर्जा नहीं माफ होगा, जिन्होंने कर्ज लेने के बाद बैंकों में अपनी किस्त का भुगतान करना प्रारंभ कर दिया था। कर्जमाफी में डिफाल्टरों को अधिक तवज्जो दी जा रही है। जिन किसानों ने कर्ज लेने के बाद एक भी रुपये खाते में नहीं जमा किया है, उन्ही किसानों का कर्जा माफ किया जा रहा है।
कर्जमाफी को लेकर प्रतिदिन नए मानक के निर्धारण का खुलासा किया जा रहा है। इससे कर्जमाफी में आने वाले किसानों की संख्या में लगातार कमी आती जा रही है। जिला प्रशासन ने जिले के 67,855 किसानों को कर्जमाफी के लिए चयनित किया था। मगर हाल ही में अफसरों यह खुलासा किया है कि मार्च 2016 के पहले ऋण लेने वाले उन किसानों का कर्जा अब नहीं माफ किया जाएगा, जिन्होंने कर्ज की किस्त की अदायगी प्रारंभ कर दी थी। कहने का आशय है कि कर्ज लेने वाले किसान ने अगर वसूली से बचने के लिए बैंक में एक भी रुपये की अदायगी कर दिया है, तो वह कर्जमाफी के दायरे से बाहर हो जाएगा। बैंक में ऋण नहीं चुकता करने वाले डिफाल्टरों का कर्जा प्राथमिकता पर माफ किया जा रहा है। योगी सरकार के इस फैसले से जिले के 14,569 किसान कर्जमाफी के दायरे से बाहर हो गए हैं। दरअसल में योगी सरकार का मानना है कि जिन किसानों ने कर्ज लेने के बाद अदायगी नहीं किया है, वह वास्तव में ऋण चुकता करने में असमर्थ हैं। इसीलिए उनका कर्ज प्राथमिकता पर माफ किया जा रहा है। जो किसान किस्त का भुगतान कर रहे हैं, उन्हें यह माना जा रहा है कि वह कर्ज की अदायगी करने में पूरी तरह सक्षम हैं और भविष्य में कर्ज अदायगी जमा भी कर देंगे।
डिफाल्टरों का कर्जा माफ करने का फैसला बैंकों के हित में हैं। बैंक कर्मियों ने अपना कमीशन लेकर डिफाल्टरों को ऋण तो दे दिया, मगर अब वसूली करने से भी मुक्ति मिल जाएगी। अधिकांश डिफाल्टर ऐसे हैं, जिसे बैंक में पहले से ही बकाएदार थे, उन्हें भी कर्ज दे दिया गया है।दरअसल में बैंक के डिफाल्टरों में बड़े किसानों का नाम शामिल है। बैंक कर्मियों की मिलीभगत से होने वाले खेल में वह एक बैंक नहीं,बल्कि कई बैंकों से मोटी रकम कर्ज के रुप में ले रखा है। हालांकि मध्यम वर्गीय किसान बैंक के बढ़ते ब्याज से बचने के लिए नियमित रुप से किस्त का भुगतान करता है। उसकी इसी सोच ने कर्जमाफी के दायरे से उसे बाहर कर दिया है।