पहले व्यावसायिक संस्थानों से लेंगे कर, दूसरे चरण में गृहकर के लिए होगा सत्यापन
संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापगढ़। नगर पालिकाओं को आत्मनिर्भर बनाने संबंधी शासन के निर्देश पर अमल आम लोगों पर भारी पड़ेगा। आदेश के अनुपालन में नपा दस फीसदी गृहकर बढ़ाने की तैयारी में है। इसी अनुपात में जलकर भी बढ़ेगा। इस प्रस्तावित कर वृद्धि से शहरियों की जेब भी ढीली होगी। योजना के पहले चरण में व्यावसायिक संस्थानों से बढ़ा कर वसूलने की तैयारी है। इससे पहले स्वकर प्रणाली के तहत किए गए आवेदनों का सत्यापन किया जाएगा। दूसरे चरण में गृहकर व जलकर बढ़ाने की कवायद होगी।
नगर पालिका के 25 वार्डों में करीब 27,123 भवन हैं। अभी विस्तारित क्षेत्र के भवनों को गृहकर से अलग रखा जाएगा। नगर पालिका में स्वकर प्रणाली लागू है। जिससे शहरियों को अभी तक राहत थी। अब शासन का पत्र मिलने के बाद नगर पालिका प्रशासन गृहकर बढ़ोतरी कर आमदनी बढ़ाने की तैयारी में है।
गृहकर का नए सिरे से निर्धारण करने के लिए पहले चरण में नगर पालिका के 25 वार्डों में संचालित व्यावसायिक संस्थानों का सत्यापन किया जाएगा। आपत्तियां भी मांगी जाएंगी। जिनका टीम गठित कर निस्तारण करने के बाद कर की नई दरें लागू की जाएंगी। बढ़े कर के दायरे में बड़े व्यावसायिक संस्थानों के साथ छोटी दुकानें भी शामिल की जाएंगी।
नगर पालिका के ईओ राम अचल कुरील ने बताया कि शासन के निर्देश का अनुपालन में पहले चरण में व्यावसायिक संस्थानों पर गृहकर की नई कर दरें लागू की जाएंगी। इसके बाद आवासीय भवनों के सत्यापन की प्रक्रिया प्रारंभ होगी। नियमानुसार आठ से दस फीसदी तक टैक्स बढ़ाने की संभावना है।
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जीआई सर्वे के आधार पर होगा सत्यापन, फिर तय होगा कर
नगर पालिका की ओर से शहर का जीआई सर्वे कराया जा चुका है, लेकिन विस्तारित क्षेत्र अभी बाकी हैं। शेष क्षेत्रों में जल्द ही जीआई सर्वे पूरा कराया जाएगा। इसके बाद गृहस्वामियाें से स्वकर प्रणाली के तहत आवेदन मांगे जाएंगे। जीआई सर्वे और स्वकर प्रणाली के तहत मिले आवेदनों का सत्यापन कराया जाएगा। इसके बाद ही कर की नई दरें लागू करने का अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
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35 फीसदी भवनों में चल रहा कारोबार, अब देना होगा कर
शहरी क्षेत्र में बने भवनों में यदि व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं तो गृहस्वामी को व्यावसायिक कर देना होगा। नगर पालिका के सर्वे में यह बात सामने आई है कि करीब 35 फीसदी पंजीकृत भवनों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हैं। मगर उनसे सामान्य गृहकर व जलकर ही लिया जाता है। ऐसे भवनों पर नगर पालिका शिकंजा कसेगी।