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ब्लॉक स्तर पर आयुष्मान मित्र रखने की तैयारी

Mon, 15 Oct 2018 12:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
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 जिले के सरकारी हो या फिर प्राइवेट अस्पतालों में किसी भी प्रकार की व्यवस्था नहीं है। पखवारे भर पहले लांच हुए आयुष्मान भारत योजना के तहत अभी तक महज एक मरीज ही भर्ती हुए हैं। अव्यवस्था के चलते कोई इस योजना के चलते इलाज नहीं कराना चाह रहा है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग के मुखिया ब्लाक स्तर पर आयुष्मान मित्र की तैनाती करने की कवायद शुरू कर दी है। इतना ही नहीं वार्डो में वार्डब्वाय और स्वीपर को  चोरी-चोरी रखा जा रहा है।
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जिले के गरीब परिवार के लोगों की इलाज के अभाव में जान न जाने पाए, इसलिए प्रधान मंत्री ने आयुष्मान भारत योजना लांच किया है। इस योजना का उद्घाटन हुए पखवारे भर हो गए। मगर अभी तक न तो कर्मचारियों की तैनाती हो सकी है और न ही चिंहित अस्पतालों में किसी भी प्रकार की व्यवस्था बढ़ाई गई। इतना ही नहीं जिन अस्पतालों में आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों का इलाज होना है वहां पर सीटी स्कैन तो दूर एक्सरे और अल्ट्रासाउंड तक की व्यवस्था नहीं की गई है। जनपद के जिला व महिला अस्पताल को छोड़ दिया जाए तो अन्य किसी अस्पताल में ऑपरेशन तक की व्यवस्था नहीं है। हाथ और पैर टूट जाए तो पात्र मरीजों का प्लास्टर चढ़ाने की कोई इंतजाम नहीं है। दरअसल चिकित्सक ही नहीं है। यहीं हाल प्राइवेट अस्पतालों का है। रूमा नर्सिंग होम में तो आईसीयू की व्यवस्था है। बाकी अन्य सेंटरों पर यह भी नहीं है। ऐसे में इस योजना के तहत बेल्हा में पात्र मरीजों का इलाज हो पाना मुश्किल है। इसी के चलते पखवारे भर में मात्र एक पात्र महिला जिला अस्पताल में भर्ती होकर अपना इलाज करा रही है।  

जनपद में 51 आयुष्मान मित्रों की तैनाती की जाएगी। इनमे से तीन जिला तो तीन महिला अस्पताल में तैनात होंगे। बाकी अन्य आयुष्मान मित्रों की तैनाती ब्लाक पर होगी। शासन के आदेश के बाद भी अभी तक इन आयुष्मान मित्रों की तैनाती नहीं हो सकी है। इनके स्थान पर स्वास्थ्य विभाग में पहले से काम कर रहे 26 स्वास्थ्य कर्मचारियों को आयुष्मान मित्र नामित करके उनसे काम लिया जा रहा है। नामित कर्मचारियों से इसके अलावा विभागीय काम लिया जा रहा है। इसके चलते वे मरीजों का मदद भी नहीं कर पा रहे हैं। इससे पात्र मरीज इलाज कराने के लिए परेशान हो रहे हैं।  
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आयुष्मान भारत योजना के तहत जनपद में एक कोआर्डिनेटर की तैनाती होनी है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से भर्ती निकाली गई थी। इस पद के लिए चिकित्सक डिग्री के साथ पांच साल का अनुभव मांगा गया था। ज्यादातर आवेदक बगैर पांच साल के अनुभव प्रमाण पत्र लगाए ही आवेदन कर दिए थे। उनका नाम काट दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों की मानी जाए तो मौखिक परीक्षा में भाग लेने के लिए अफसरों और नेताओं के चुनिंदा लोगों की सूची तैयार हो गई है। जिनका होना है उस पर मुहर भी लग गया है। हालांकि अभी उसका नाम ओपेन नहीं किया जा रहा है। इससे अन्य आवेदक परेशान हैं।  

अभी जिन पदों के लिए भर्ती निकाली गई हैं, उनका ही होगा। ब्लाक स्तर पर जब आयुष्मान मित्र की तैनाती की जाएगी तो बाकायदा इसके लिए विज्ञापन निकाला जाएगा। शासन की ओर से स्वीपर और वार्ड ब्वाय की तैनाती के लिए अभी किसी भी प्रकार का आदेश नहीं आया है। यदि निजी नर्सिंग होम संचालक पात्र लोगों का इलाज नहीं कर रहे हैं तो इसकी शिकायत करें। अस्पताल संचालक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।   
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एके श्रीवास्तव, सीएमओ।
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