निमंत्रण जाने के दौरान दबंगों की पिटाई की शिकायत लेकर पहुंचे फरियादी को पुलिस द्वारा जमीन में लिटाकर पूछताछ करने का मामला सामने आया है। पुलिस की इस शर्मनाक करतूत से महकमे की जमकर बदनामी हुई। अंग्रेजों के जमाने में बनी इस कोतवाली में आजादी के सात दशक बाद भी गुलामों जैसा व्यवहार हुआ। यहां मानवाधिकार की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गईं। पुलिसिया खौफ के चलते लोग कुछ भी बोल पाने का साहस नहीं जुटा पा रहे हैं।
लालगंज कोतवाली का निर्माण वर्ष 1913 में अंग्रेजी हुकूमत द्वारा करवाया गया था। आजादी मिलने के बाद कोतवाली के इस भवन पर सत्यमेव जयते जरूर लिखा दिया गया, लेकिन फरियादियों से यहां आज भी गुलामों की तरह ही व्यवहार होता है। लालगंज पुलिस की इस तरह की करतूत आजकल सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है। बताया जाता है कि लालगंज कोतवाली के खजुरी गांव का रहने वाला त्रिवेणी प्रसाद विश्वकर्मा एक निमंत्रण में शामिल होने जा रहा था।
रास्ते में दबंगों की पिटाई से वह मरणासन्न हो गया। आनन फानन में परिजन उसे लेकर लालगंज कोतवाली पहुंच गए। मरणासन्न होने के चलते पीड़ित कोतवाल की कुर्सी के सामने जमीन पर ही लेट गया। लेकिन पुलिस ने पीड़ित को जमीन पर लिटाकर ही पूछताछ शुरू कर दी। अफसर से लेकर कार्यालय व संतरी की ड्यिुटी पर तैनात पुलिस कर्मियों को इतनी भी दया नही आई कि फरियादी को बेंच या कुर्सी पर बैठाकर पूछताछ कर लेती।
करीब आधे घंटे पीड़ित पुलिस के सामने जमीन पर लेटा हुआ तड़पता रहा, लेकिन उसे न तो बैठने के लिए कहा गया और न ही अस्पताल भेजा गया। बाद में उसे परिजन अस्पताल उपचार के लिए लेकर चले गए। हालांकि अस्पताल में वह उपचार कराने के बाद ठीक होकर घर चला गया, लेकिन पुलिस की शर्मनाक करतूत तब तक लोगों के सामने आ चुकी थी।
पीड़ित की फोटो ही पुलिस कर्मियों की निर्दयता को साफ तौर पर दर्शाने के लिए काफी है। आजादी के बाद देश से अंग्रेजों के जाने के सत्तर दशक बाद भी इस कोतवाली में आज भी फरियादियों से अंग्रेजों की तरह जुल्म होता है। यहां की पुलिस को न तो मानवाधिकार की चिंता है और न ही महकमे की इज्जत की परवाह। एक तरफ जिले के तेज तर्रार पुलिस अधीक्षक अभिषेक सिंह पुलिस की साख बनाने के लिए दिन रात जुटे हुए हैं, वहीं दूसरी ओर लालगंज पुलिस की शर्मनाक करतूत उनकेे इरादे का पानी फेरता नजर आ रहा है।
मानवाधिकार की धज्जियां उड़ाने वाले अफसरों व पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई की तलवार भी लटक रही है। कोतवाल सुभाष यादव ने बताया कि मामले को बिना वजह तूल दिया जा रहा है। रंजिश के चलते मारपीट की घटना हुई है। उसे एंबुलेंस से अस्पताल भेज दिया गया है। इस बारे सीओ रमेश चंद्र से कई बार बात करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका मोबाइल फोन रिसीव नहीं हो सका।