पोस्टल बैलेट की गिनती न कराने को लेकर भाजपा नेता और पूर्व मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह उर्फ मोती सिंह की याचिका पर हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने पट्टी विधानसभा के विधायक रहे राम सिंह की न सिर्फ सदस्यता खत्म कर दी, बल्कि उन्हें पूर्व विधायक मानने से भी इनकार कर दिया। ऐसे में शासन की तरफ से पूर्व विधायकों को मिलने वाली सुविधाओं से भी वह महरूम हो जाएंगे। हालांकि हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब वह इस आदेश को सुप्रीमकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी में लगे हैं।
शासन की तरफ से जहां विधायकों को विभिन्न सुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं, वहीं पूर्व विधायकों को भी कई तरह के लाभ दिए जाते हैं। मौजूद विधायकों को सरकार वेतन के रूप में करीब 97 हजार, यात्रा के लिए डेढ़ लाख के आरटीसी कूपन, दो टेलीफोन, राजधानी में फ्लैट समेत अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराती है। इसी तरह पूर्व विधायकों के लिए भी 16 हजार रुपये महीने पेंशन, 80 हजार रुपये का यात्रा कूपन (आरटीसी) व बस में मुफ्त यात्रा के साथ ही डाकबंगले में रुकने की सहूलियत है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में राम सिंह को पूर्व विधायक भी नहीं माना है। ऐसे में उन्हें यह सुविधाएं भी नहीं मिलेंगी। हालांकि रामसिंह हाईकोर्ट के आदेश के बाद सुप्रीमकोर्ट जाने की तैयारी में हैं।