जनपद के अधिकांश थानों की दशा बूचड़खानों जैसी है। जनता को चैन की नींद सुलाने वाले पुलिसकर्मी खुद की नींद के लिए करवटें बदलते हैं। सिपाही तो दूर दरोगा और थानेदार भी टीनशेड में रहने को मजबूर हैं। आला अधिकारियों से शिकायत पर शिकायत हुई, लेकिन अभी तक बात नहीं बन सकी। बरसात में लालगंज कोतवाली तालतलैया के रूप में नजर आती है।
जनपद में महिला थाने को लेकर कुल 21 थाने हैं। जिले के अधिकांश थानों में पुलिसकर्मियों के लिए रहने-सोने की व्यवस्था ठीक नहीं है। मौजूदा समय में नगर कोतवाली की सूरत बद से बदतर दिखती है। पुराने भवन के साथ लगकर बने नए भवन में भले ही कामकाज संचालित होता हो, लेकिन हालत ऐसी है कि रात में कर्मचारियों को अपने कमरों में जाने पर भय लगता है। कोतवाली की चहारदीवारी एक छोर पर है तो दूसरे पर गायब है। दोनों तरफ गेट लगा ही नहीं है। सबसे दयनीय थानों की श्रेणी में कोहंडौर, नवाबगंज, बाघराय, कुंडा, कंधई, लालगंज हैं। इनसे संबंधित पुलिस चौकियों की भी हालत खराब है। जहां तैनात पुलिसकर्मियों की नींद गायब रहती है।
कोहंडौर थाना दूसरे की जमीन पर संचालित है। आधुनिक जमाने में कच्चे खपरैल में थाना भवन है। कार्यालय व पुलिसकर्मियों का आवास देखने से लगता है कि अभी भी पुलिस विभाग बाबा आदम के जमाने में जी रहा है। सिपाही तो किसी तरह काम चला लेते हैं, लेकिन एसओ को भी टीनशेड वाला आवास मिला है। जनता के रखवालों की हालत बाघराय में भी बेहतर नहीं है। थाने की चहारदीवारी गायब है। सिपाहियों के लिए बनाए गए आवासों की भी दशा बेहतर नहीं है। नवाबगंज थाना भले ही बाहर से देखने में ठीक लगता हो, लेकिन भीतर घुसते ही विभाग की पोल खुल जाती है। यहां थानेदार को छप्परनुमा में आवास में रहना पड़ता है। कमोबेश यही हाल कंधई थाने का भी है। यहां भी हर ओर से लोगों का आना-जाना रहता है। 24 घंटे पुलिसकर्मी खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं। लालगंज कोतवाली की दयनीय दशा बरसात में देखने को मिलती है। पुराने भवन में बारिश से पुलिसकर्मियों का रहना तक दुश्वार हो जाता है। कार्यालय भी पुलिसकर्मियों को बदलना पड़ता है।