महिलाओं के लिए संचालित तमाम योजनाओं में सरकारी छूट का लाभ उनके पति, ससुर और देवर उठा रहे हैं। खादी ग्रामोद्योग से व्यापार के लिए करीब 150 से ज्यादा महिलाओं के नाम लोन पास हुआ है। मगर महिलाओं को इसकी शायद ही जानकारी हो। विभाग भी इस पर अंकुश लगाने में नाकाम दिख रहा है।
उद्यान विभाग, कृषि विभाग के साथ ही बैंकों से महिलाओं के नाम पर उद्योग लगाने या फिर स्वरोजगार करने के अवसर मुहैया कराए जाते हैं। इसके बाद भी महिलाएं इन योजनाओं का लाभ नहीं उठा पाती हैं। महिलाओं के नाम पर संचालित योजनाओं और सरकारी छूट का लाभ उनके पति, ससुर और देवर उठा रहे हैं। महिलाओं को यह भी नहीं पता होता है कि उनके नाम से स्वरोजगार करने के लिए बैंक या फिर किसी विभाग से लोन लिया गया है। रोजगार हो रहा है तो ऋण जमा हो रहा है कि नहीं हो रहा है। जब महिलाओं के घर उनके नाम से नोटिस पहुंचता है तो वे परेशान हो उठती हैं। फिर इसकी शिकायत लेकर दर-दर की ठोकर खाने लगती है।
महिलाओं के नाम से योजना का लाभ लेने के लिए जब उनके परिजन विभाग पहुंचते हैं तो अधिकारियों की जेब भरने से भी पीछे नहीं रहते हैं। कमीशन मिलने के बाद अधिकारी फाइल को पास कर देते हैं। इसके बाद वे फाइल को लेकर बैंक पहुंच जाते हैं और लोन पास करवा लेते हैं। इसके बाद महिलाओं के नाम स्वरोजगार शुरू कर देते हैं। इस ओर विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों का भी ध्यान नहीं पड़ रहा है। इससे महिलाएं स्वरोजगार के मामले में पीछे होती चली जा रही हैं।