गाड़ियों पर पदनाम, विभाग, संस्था का नाम लिखाकर रौब गांठना जिले के लोगों की आदत में शुमार हो गया है। हर तीसरी गाड़ी पर आपको पदनाम, विभाग, प्रेस या फिर पुलिस लिखा दिख जाएगा। गाड़ी खरीदने के बाद अपनी हनक दिखाने और रौब गांठने के लिए पहला काम लोग यही करते हैं। परिवहन विभाग और पुलिस भी ऐसे वाहनों को रोकने से बचते हैं। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद देखना है कि विभाग ऐसे कितने वाहनों पर कार्रवाई करता है।
वैसे तो जिले में परिवहन के कायदे कानून बकवास हैं। अफसरों को इसकी परवाह नहीं है। नम्बर प्लेट रसूख और रौब गांठने का साधन बन चुके हैं। नम्बर प्लेट पर पुलिस, डीएम आफिस, मानवाधिकार आयोग, जिलाध्यक्ष, उपाध्यक्ष, विकास भवन, उत्तर प्रदेश सरकार, भारत सरकार, एसपी कार्यालय, न्याय विभाग, प्रधान, ब्लाक प्रमुख, पूर्व विधायक, आर्मी जैसे विभाग व पद लिखे वाहन किसी भी प्रमुख चौराहों पर आसानी से देखे जा सकते हैं। सच यह है कि उनमें से अधिकांश उन विभागों में हैं ही नहीं। वाहनों पर पदनाम लिखानों वालों पर भले ही नियम व कानून बनाने वाले शिकंजा नही कस पा रहे, लेकिन हाईकोर्ट ने ऐसे लोगों की लगाम कसने के लिए संबंधित अधिकारियों को आदेश दिया है।
इसे हनक और रसूख दिखाने का तरीका कहा जाए या मनमानी, लेकिन शहर से लेकर गांव तक में खुलेआम यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाती हजारों गाड़ियां बेखौफ होकर घूम रही हैं। एआरटीओ और ट्रैफिक पुलिस की ओर से कभी ऐसे नाम लिखे वाहनों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई। यही वजह है कि ऐसा लिखवाने वालों की मनमानी बढ़ती गई। दो पहिया व चार पहिया वाहनों में नम्बर प्लेट केबजाए नेम प्लेट का एक फैशन सा चल पड़ा है। हद तो यह है कि न्यायालय, पार्टी और पद भी लिखाकर लोग खुलेआम घूम रहे हैं। हर बात पर रौब गांठने वाली सिविल पुलिस भी कभी ऐसे वाहनों पर कार्रवाई की कोशिश नहीं की। विभागों के नाम के साथ अब तो उसका लोगो भी बनवाया जाने लगा है।