प्रतापगढ़ रेलवे स्टेशन पर रविवार को इंटरसिटी एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त होने से बच गई। क्लैंप को उल्टा बांधकर लखनऊ से वाराणसी जा रही इंटरसिटी एक्सप्रेस को चला दिया गया। कर्मचारियों को जब इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने दौड़ते हुए लाल झंडी दिखाकर ट्रेन को रुकवाया। चालक ने हड़बड़ी में इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन को रोक लिया। अगर तनिक भी देर हो जाती तो ट्रेन पटरी के बजाए जमीन पर होती। ट्रेन के रुकने के बाद कर्मचारियों को क्लैंप को सीधा बांधा। तब जाकर प्वाइंट बना और ट्रेन करीब पैंतालिस मिनट बाद यहां से रवाना हुई। जिम्मेदार इस घटना को पचा ले गए। सिग्नल और परिचालन के लोग इस घटना से पल्ला झाड़ लिए।
लखनऊ से वाराणसी जाने वाली 14204 इंटरसिटी एक्सप्रेस रविवार को प्रतापगढ़ स्टेशन के प्लेटफार्म तीन पर आई। छूटने को हुई तभी सूचना मिली कि प्वाइंट बदलने वाला रॉड टूट गया है। जिससे सिग्नल फेल्योर हो गया है। मौके पर पहुंचे कर्मचारियों ने क्लैंप की प्रक्रिया के तहत प्वाइंट ठीक किया। फिर सिग्नल ठीक नहीं हुआ। ट्रेन को लेटलतीफी से बचाने के लिए उसको कागज पर रवाना किया गया। ट्रेन प्लेटफार्म वाले सिग्नल को पार करते हुए डायमंड क्रासिंग की ओर बढ़ रही थी। इसी बीच टूटी रॉड को जोड़ने के लिए मौके पर पहुंचे सिग्नल के कर्मचारियों ने देखा कि क्लैंप उल्टा बांध दिया गया है। जिससे गाड़ी पलट सकती है।
इससे उनके होश उड़ गए। एक कर्मचारी दौड़ता हुआ गया और लाल झंडी दिखा दिया। खतरे का संकेत मिलने पर चालक ने फौरन गाड़ी वहीं पर रोक दी। उसके बाद रॉड की वेल्ंिडग कराई गई। प्वांइट ठीक होने के बाद ही ट्रेन को बढ़ाया गया। इस बारे में एसएस केएन शर्मा का कहना है कि रॉड टूट गया था। जिससे सिग्नल फेल हो गया था। क्लैंप कर गाड़ी को कागज पर चलाया गया। सूचना के बाद भी सिग्नल के लोग समय से मौके पर नहीं पहुंचे। जिससे ट्रेन लेट हुई। लिखा-पढ़ी में फेल्योर लिखा गया है। इस बारे में सिग्नल के वरिष्ठ खंड अभियंता पूर्णेंदू सिंह का कहना है कि इस बारे में उनके बड़े अधिकारी ही बताने के लिए अधिकृत हैं।