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इमरजेंसी के बजाए महोत्सव और भंडारे में लगाई जा रही 108 एंबुलेंस

Fri, 12 Feb 2016 11:39 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
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मुख्यमंत्री की पसंदीदा योजनाओं में शुमार 108 समाजवादी एंबुलेंस सेवा जिले में मजाक बनकर रह गई है। इसे इमरजेंसी सेवा के लिए चलाया गया है, लेकिन इसको महोत्सव और भंडारे में भी लगाया जा रहा है। एंबुलेंस की दूरी और ईंधन का ब्यौरा भी नहीं दर्ज किया जा रहा है।
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दरअसल, 108 समाजवादी एंबुलेंस सेवा का उपयोग इमरजेंसी परिस्थितियों में रोगी को राजकीय चिकित्सा इकाई तक पहुंचाने तथा गंभीर परिस्थितियों में रेफर किए जाने पर अंर्तजनपदीय संदर्भन में किया जाना अनुमन्य है। चिह्नित कार्यों के अलावा एंबुलेंस का इस्तेमाल दूसरे कार्यों में किए जाने पर एंबुलेंस की उपलब्धता प्रभावित होती है तथा वास्तविक रोगी/लाभार्थी को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। मजे की बात है कि स्वास्थ्य महकमे के ही जिम्मेदार लोग शासनादेश की धज्जियां उड़ाने से बाज नहीं आ रहे हैं। वे समाजवादी एंबुलेंस को सामाजिक कार्यक्रमों में भेजने अपनी शान समझते हैं।

18 सितंबर 2015 को 108 एंबुलेंस सेवा को अजगरा महोत्सव मेला में तीन दिन के लिए भेजा गया। 6 जनवरी 2016 शनिदेव कुसफरा में आयोजित भंडारे में एंबुलेंस को भेजा गया। इसी दिन जिला पंचायत अध्यक्ष की मतगणना में भी एंबुलेस सेवा का इस्तेमाल किया गया। इस बारे में एंबुलेंस सेवा के प्रोग्राम मैनेजर दिवाकर तिवारी ने बताया कि स्वास्थ्य महकमे के अधिकारी एंबुलेंस जहां भेजने के लिए कहते हैं वहां भेज दिया जाता है।
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जब सारे काम 108 एंबुलेंस से ही लिए जा रहे हैं तो सवाल उठता है कि जिले में सीएमओ के अधीन दर्जन भर एंबुलेंस क्या कर रही हैं। उनका इस्तेमाल जिम्मेदार क्यों नहीं कर रहे हैं और अगर कर रहे हैं तो कहां पर। छह माह पहले तत्कालीन महानिदेशक विजय लक्ष्मी चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं उप्र ने शिकायत मिलने पर महोत्सव, भंडारा और लाशों के ढोने पर पाबंदी लगाई थी। मगर पाबंदी के बाद भी दुरुपयोग नहीं रुक रहा है।
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