सिंचाई के लिए परेशान जिले के किसानों को एक और झटका लगा है। गेहूं की सिंचाई के लिए उन्हें पानी नहीं मिल पाएगा। दरअसल घाघरा और शारदा नदी का पानी गंगा में छोड़ दिया गया है। ऐसे में जिले की नहरों में पानी की आपूर्ति नहीं हो पाएगी। जिले के लालगंज, कुंडा, रानीगंज और पट्टी इलाकों में नहरों का जाल फैला हुआ है। इन तहसीलों के अधिकांश किसान नहरों से ही सिंचाई करते हैं। आलम यह है कि लगभग पंद्रह दिनों से नहरें सूखी हुई हैं। पानी नहीं आने से किसानों की खेती चौपट हो रही है। पानी की मांग को लेकर किसानों ने जब अफसरों तक बात पहुंचाई तो उन्होंने पानी देने से हाथ खड़े कर दिए। सिंचाई विभाग के अधिकारियों की मानें तो जिले की नहरों में घाघरा और शारदा नदियों से पानी आता है, मगर इन नदियों में जो पानी था उसे स्नानार्थियों के लिए गंगा में छोड़ दिया गया।
वर्तमान में इन नदियों में महज आठ सौ क्यूसेक पानी है। इस पानी को रिजर्व में रखा गया है। अगर यह पानी नहरों में छोड़ भी दिया जाए तो उससे किसानों का भला नहीं होने वाला है। इससे गेहूं की सिंचाई को लेकर संकट गहरा गया है। हालांकि जिस प्रकार सिंचाई विभाग अपनी मजबूरी बता रहा है उससे तो नहीं लगता है कि फरवरी और मार्च के माह में भी नहरों में बूंद भर पानी आएगा। अगर अफसरों की बातें सच हुईं तो किसानों की परेशानी बढ़ सकती है। जिस तरह से धूप हो रही है, उससे स्पष्ट है कि गर्मी बढ़ने के साथ ही पानी की मांग बढ़ेगी और फसलों को पानी नहीं मिलने पर उत्पादकता पर असर पडे़गा। अधिशाषी अभियंता संजय त्रिपाठी ने बताया कि पानी को लेकर संकट गहरा गया है। रबी के सीजन में पानी मिलने की संभावना नहीं रह गई है। उन्होंने बताया कि शासन तक यह बात पहुंचा दी गई है, जल्द ही विकल्प खोजा जाएगा।