फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दाने-दाने के लिए मोहताज हैं बालगृह के बच्चे

Mon, 08 Feb 2016 11:38 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
विज्ञापन
विज्ञापन
शहर के मीरा भवन स्थित बालगृह (बालक) के बच्चे और कर्मचारी दाने-दाने के लिए मोहताज हैं। चालू वित्तीय वर्ष के 11 माह बीतने के बाद भी बजट नहीं मिलने से उनके सामने खाने-पीने का संकट खड़ा हो गया है। बालगृह में रहने वाले बच्चों के लिए शाम को जलने वाला चूल्हा स्थानीय लोगों की कृपा पर निर्भर है।
विज्ञापन


इलाहाबाद, कौशांबी, फतेहपुर और प्रतापगढ़ के नाबालिग बच्चों की देखरेख और खान-पान की जिम्मेदारी बालगृह के कर्मचारियों पर होती है। महिला एवं बाल विकास विभाग से संचालित एनजीओ के पास वर्तमान में 14 बच्चे हैं। इन बच्चों की पढ़ाई-लिखाई, खान-पान और कपडे़ के लिए प्रतिवर्ष शासन से बजट मिलता है। मगर चालू वित्तीय वर्ष में 11 माह का समय बीतने के बाद भी शासन से बजट नहीं मिला है। ऐसे में बालगृह में तैनात कर्मचारी बच्चों का पेट भरने के लिए आसपास के लोगों की मदद पर निर्भर हैं।

एनजीओ को बजट नहीं मिलने से बच्चों का पठन-पाठन और सेहत भी प्रभावित हो रही है। आलम यह है कि स्थानीय लोगों की कृपा पर चूल्हा जलता है। कभी-कभी ऐसा भी मौका आता है, जब बच्चों को बगैर खाना खाए ही रात बितानी पड़ती है।  बालगृह के संचालक सुरेशचंद्र पांडेय ने बताया कि बजट के अभाव में बालगृह की व्यवस्था चरमरा गई है। उन्होंने बताया कि बच्चों के खान-पान के लिए संस्था और स्थानीय लोगों से सहयोग लिया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें