यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इटंरमीडिएट परीक्षा नकलविहीन कराना जिला प्रशासन के लिए एक चुनौती बनी हुई है। 18 फरवरी से श्ुारू हो रही परीक्षा के लिए जिले में 367 कॉलेजों को परीक्षा केंद्र बनाया गया है। बीते वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष होने वाली परीक्षा में छात्र-छात्राओं की संख्या में इजाफा होने के बावजूद केंद्रों की संख्या नहीं बढ़ाई गई है।
डीआईओएस की तरफ से नकलविहीन परीक्षा कराने के लिए शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारियों को सचल दल के रूप में तैनात कर कॉलेजों पर नजर रखने की जिम्मेदारी दी जा रही है। आश्चर्य की बात तो यह है कि पिछले वर्ष चुनाव में खुलेआम नकल कराने वाले कॉलेजों को भी इस वर्ष परीक्षा केंद्र बना दिया गया है। इससे देखना यह है कि उन कॉलेजों की मनमानी पर कैसे रोक लगती है। वर्ष 2015 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा में 1,56,472 परीक्षार्थियों के लिए 367 केंद्र बनाए गए थे, जबकि चालू शिक्षासत्र वर्ष 2016 में 1,66,689 परीक्षार्थी शामिल हो रहे हैं। मगर परीक्षा केंद्रों की संख्या पुरानी ही है।
इससे स्वाभाविक है कि इस वर्ष परीक्षार्थियों की बढ़ी संख्या 10,217 को उन्हीं केंद्रों पर व्यवस्था देनी होगी। इससे केंद्रों पर जहां भीड़ बढे़गी, वहीं नकल रोकना जिला प्रशासन के लिए चुनौती साबित होगी। डीआईओएस शिव कुमार ओझा ने बताया कि परीक्षा नकलविहीन कराने के लिए अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी जा चुकी है। जिस केंद्र पर नकल होगी, उसकी परीक्षा निरस्त कर जीआईसी में कराई जाएगी।