मॉडल डिपो बनाने की कवायद तो शुरू हो गई, मगर अधिकारियों की सांठ-गांठ के चलते ठेकेदार निर्माण में खेल कर रहे हैं। निर्माण कार्य में पुरानी ईंटाें को उखाड़ कर नए भवन में लगाया जा रहा है। भवन निर्माण में मानक एक चार के मसाले का है जबकि ठेकेदार एक आठ का मसाला प्रयोग कर रहे हैं। शिकायत के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदकर बैठे हुए हैं।
जिले के रोडवेज डिपो की खराब दशा को देखते हुए शासन ने मॉडल डिपो बनाने के लिए एक करोड़ 80 लाख रुपये दिए हैं। इसके निर्माण के लिए मुकेश कंन्सट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी लखनऊ ने ठेका लिया है। डिपो निर्माण कार्य भी शुरू हो गया। पहले पुराने भवन को तोड़ा गया। इन दिनों नया भवन बनने का काम शुरू हो गया है। विभाग के अवर अभियंता और ठेकेदार की मिलीभगत से निर्माण में व्यापक धांधली की जा रही है। पुराने भवन से निकली र्हुइं ईंटों को साफ कर नए भवन में लगाया जा रहा है।
निर्माण कार्य में लगे मजदूरों की बातों पर गौर किया जाए तो चार, एक के सीमेंट के मसाले की जोड़ाई की जगह आठ, एक का मसाले से ईंट की जोड़ाई करवा रहे हैं। एक ओर पुरानी ईंट तो दूसरी ओर कम सीमेंट के मसाले की जोड़ाई के चलते भवन की गुणवत्ता पर सवाल खड़ा हो गया है। आश्चर्यजनक बात यह है कि एआरएम प्रतिदिन अपनी आंखों से निर्माण में होने वाले इस खेल को देख रहे हैं। इसके बावजूद जुबान खोलना उचित नहीं समझ रहे हैं। इससे बेल्हावासियों के साथ रोडवेज संगठन के पदाधिकारियों में रोष है।