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मुकदमों के आंकड़ों की बाजीगरी में जुटे थानेदार

Sun, 31 Jan 2016 11:45 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
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जिले में आपराधिक घटनाओं को रोकने के साथ ही पीड़ितों को न्याय दिलाने का आदेश आला अधिकारी बराबर अपने मातहतों को देते रहे हैं। लगातार कड़ाई का नतीजा है कि नए साल से थानेदार कम मुकदमों की आंकड़े बाजी में जुट गए हैं। कई थानों पर फरियादियों की बात सुनने के बजाय उन्हें दुत्कार कर भगा दिया जा रहा है। इससे पीड़ित अब थानों पर जाने से कतराने लगे हैं।
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पुलिस विभाग के मुखिया जावेद अहमद के साथ ही पुलिस अधीक्षक माधव प्रसाद वर्मा भले ही मातहतों को पीड़ितों के साथ सरलता से पेश आने व मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई का निर्देश देते रहते हैं, लेकिन इसका असर कम ही देखने को मिलता है। अपने अधिकारियों के आदेश पर गिने-चुने मामले में ही पुलिस कार्रवाई करती है वह भी दूसरे रूप में। खास बात यह है कि वर्ष 2015 में लालगंज में हत्या की घटनाएं बढ़ी थीं तो नगर कोतवाली में चोरी व छिनैती का ग्राफ बढ़ा था। इसे लेकर अधिकारियों ने थानेदारों को कड़ी फटकार लगाई थी। नए साल में अपराधों पर अंकुश लगाने के बजाए जिले के थानेदार आंकड़ों की बाजीगरी कर अपराध कम दर्शाने में जुट गए हैं।

 नगर कोतवाली, रानीगंज, कोहंड़ौर, लालगंज, जेठवारा, मानधाता, फतनपुर, पट्टी, कंधई, महेशगंज, सांगीपुर, कुंडा, हथिगवां के थानेदार अपराध के आंकड़ों को कम करने में जुटे हैं। इन थानों पर कार्रवाई न होने के चलते पीड़ित हर दिन अधिकारियों के कार्यालय पर शिकायत लेकर पहुंचते रहते हैं। यहां तक कि अपर पुलिस अधीक्षक से लेकर क्षेत्राधिकारियों के आदेश का भी अनुपालन न करते हुए थानेदार मुकदमा दर्ज करने से बच रहे हैं। पुलिस सूत्रों की मानें इससे थानेदार यह दिखाना चाह रहे हैं कि नए साल में अपराधों पर अंकुश लगाने में वह सफल हुए हैं। जबकि तमाम मारपीट की घटनाओं को एनसीआर में तब्दील करने के साथ ही चोरी की घटनाओं को जांच के नाम पर बराबर पचाया जा रहा है। इससे अधिकारी भी वाकिफ हैं, लेकिन वे भी थानेदारों की करतूतों को कोस रहे हैं।
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