जिले के सांसदों को अब वित्तविहीन शिक्षण-संस्थाओं को भी अपनी निधि से धन बांटने की छूट मिल गई है। केंद्र सरकार का नया आदेश आने से अब सांसद अपने करीबियों को संतुष्ट करने में कामयाब हो जाएंगे। पूर्व में सरकारी और शासकीय स्कूलों को ही धनराशि देने का आदेश दिया गया था।
जिले में कान्वेंट, माध्यमिक, उच्चशिक्षा और तकनीकी शिक्षा से संबंधित संस्थान संचालित करने वाले संचालकों को अब सांसद निधि से भी शिक्षण कक्ष, प्रयोगशाला, कंप्यूटर कक्ष, सभागार बनाने के लिए धनराशि मिलेगी। भारत सरकार ने इस आशय का आदेश जारी कर दिया है। पूर्व में सरकार ने राजकीय और सहायता प्राप्त शिक्षण-संस्थानों को ही सांसद निधि देने का आदेश जारी किया था। इससे सांसद के चुनाव में उनकी नैया पार लगाने वाले भाग्यविधाता कोई लाभ नहीं उठा पाते थे।
सांसदों को भी इस बात का कष्ट रहता था कि चुनाव में उनके साथ पसीना बहाने वाले साथियों की इच्छा वह पूरी नहीं कर पाते थे। मगर भारत सरकार के नए फैसले से अब कॉलेज संचालकों को सांसद दिल खोलकर अपनी निधि बांट सकेंगे। डीडीओ और प्रभारी पीडी रमाकांत तिवारी ने बताया कि भारत सरकार के नए आदेश से अब प्राइवेट संस्थाओं को राहत मिल जाएगी। उन्होंने बताया कि सांसदों का प्रस्ताव आते ही संस्थाओं को धनराशि दी जाएगी।