प्रधानमंत्री मोदी के स्वच्छ भारत मिशन से सरकारी अस्पतालों को भी जोड़ दिया गया है। इससे राष्ट्रीय ग्रामीण मिशन के तहत अस्पतालों की सफाई के लिए चलाई जा रही कायाकल्प योजना अब सीधे स्वच्छता मिशन से जुड़ गई है। सूबे का जो भी सरकारी अस्पताल कायाकल्प योजना के मानकों पर खरा उतरेगा, उसको मिशन की ओर से पचास से बीस लाख रुपये रुपये का ईनाम मिलेगा। ग्रामीण अस्पतालों में पांच से एक लाख का पुरस्कार रखा गया है। 31 जनवरी को यह पुरस्कार बांटा जाएगा।
गंदगी से बीमार सूबे के अस्पतालों की दशा सुधारने और स्टाफ को पहले से काबिल बनाने के उद्देश्य से एनआरएचएम ने कायाकल्प योजना चलाई है। दरअसल, सरकारी अस्पतालों में गंदगी का अंबार लगा रहता है। वार्ड से लेकर परिसर तक कूड़ा ही नजर आता है। बदबू के कारण मरीज और तीमारदारों का अंदर सांस लेना दुश्वार है। स्टाफ को उपकरण चलाने का ज्ञान नहीं है। ड्रेनेज की व्यवस्था न होने से बजबजाती नालियों का पानी परिसर में बह रहा है। जिले के अस्पतालों की सूरत भी कुछ ऐसी ही है। इसमें सुधार के उद्देश्य से कायाकल्प योजना शुरू की गई है। कायाकल्प योजना के मानकों पर जो भी सरकारी अस्पताल खरा उतरेगा, उसे भारत सरकार सम्मानित करेगी।
कायाकल्प के मानकों को पूरा करने में फिसड्डी साबित होने वाले अस्पतालों की खैर नहीं है। वहां के अधीक्षक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। निरीक्षण करने वाली टीम अगर किसी अस्पताल कोे 70 से ऊपर नंबर देती है तभी वह अस्पताल ईनाम की श्रेणी में रखा जाएगा। प्रतापगढ़ को किस श्रेणी में रखा गया है अभी इसका पता नहीं चल पाया है। हां इतना जरूर है कि जांच करने आई एनआरएचएम की टीम व्यवस्था से खुश नजर नहीं आई थी। कायाकल्प योजना के मानकों पर खरा उतरने वाले जिला अस्पतालों को देने के लिए प्रथम पुरस्कार 50 लाख, दूसरा 30 और तीसरा 20 लाख रखा गया है। इसी तरह से पीएचसी और सीएचसी के लिए क्रमश: 5,3 और 1 लाख रुपये की धनराशि रखी गई है।