गलन भरी ठंड से लोगों का हाल बेहाल है। शरीर को बेधने वाली पछुआ हवाएं शुक्रवार को भी दिनभर चलती रहीं। बादलों की ओट से सूर्यदेव झांकते रहे, मगर शीतलहर के आगे उनकी एक नहीं चली। कड़ाके की ठंड से बचने के लिए लोग गर्म कपड़ों में लिपटे रहे। बावजूद इसके कहीं राहत नहीं मिल पा रही थी।
शुक्रवार को भी पछुआ का कहर जारी रहा। आसमान में बादल और दिनभर चलने वाली पछुआ हवाओं ने लोगों को घरों में कैद रहने के लिए बाध्य कर दिया। हवाओं के जोर से शुक्रवार को ठंड का स्वरूप और भयानक हो गया। तेज गति से चलने वाली बर्फीली हवाएं शरीर के अंग को सुन्न कर दे रही थीं। शाम को ठंड का कहर इतना बढ़ गया कि हाथ, पैर काम नहीं कर रहे थे। गर्म कपड़ों से लैश होने के बाद भी लोग कांप रहे थे।
सड़क और चौराहों पर लोग अलाव को चारों ओर से घेरे हुए थे। बरसात के बाद पड़ रही ठंड ने सभी हिलाकर रख दिया है। बुजुर्ग लोगों के लिए यह ठंड कातिल बनी हुई है। दिन में धूप निकलने से लोग दिनभर अलाव के सहारे बैठकर समय काट रहे हैं। शुक्रवार को ठंड का स्वरूप देखकर ऐसा नहीं लगता है कि जल्दी निजात मिलने वाली है। फिलहाल ऊनी कपड़ों की दुकानों पर खरीदारी बढ़ गई है।