शासन के आदेश के बावजूद पॉलीथिन पर रोक लगाने में जिला प्रशासन नाकाम दिख रहा है। खुलेआम शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक प्लास्टिक थैलियों व कैरीबैग का इस्तेमाल धड़ल्ले से किया जा रहा है। जिस पर प्रभावी ढंग से प्रशासन रोक नहीं लगा पा रहा है। सिर्फ कागजों पर ही प्लास्टिक प्रयोग पर रोक लगाई जा रही है। जबकि हकीकत में लोगों से पालीथिन दूर नहीं हो सकी है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के सख्त आदेश के बाद प्लास्टिक थैलियों व कैरीबैग पर प्रतिबंध लगाने के लिए शासन ने 22 दिसंबर को अधिसूचना जारी कर दी थी। प्रतिबंध कारगर ढंग से लागू करने के लिए जिलाधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। इसके बावजूद शहर से लेकर ग्रामीणांचलों में पॉलीथिन के प्रयोग पर रोक नहीं लग पा रही है। जबकि पर्यावरण के लिए काल बन चुका पालीथिन हर रोज लोगों द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा है।
इसका प्रयोग कर लोग इसे खुले में फेंक रहे हैं। जिसे खाने से असमय जानवरों की मौत हो रही है। साथ ही नालियों में फेंका जाने वाला पालीथिन सीवरेज और नालों को चोक कर दे रहा है। शहर के बाजारों व सब्जी की दुकानों से लेकर मंदिरों में प्रसाद की दुकानों पर इस पालिथिन का प्रयोग किया जा रहा है। यहीं नहीं शहर के प्रमुख कपड़ा शोरूमों में भी पालीथिन का प्रयोग किया जा रहा है। इसके लिए शोरूम संचालक पालीथिन पर पांच से दस रुपये चार्ज भी लगाते हैं।