कस्तूरबा आवासीय बालिका विद्यालय में पढ़ने वाली छात्राएं बदहाली का दंश झेल रही हैं। विद्यालय में व्यवस्थाओं के साथ ही खाने-पीने में भी कटौती की जा रही है। यही नहीं शिक्षक और शिक्षिकाओं के साथ ही बाबू भी विद्यालय से गायब रहते हैं। ऐसे में बालिकाओं की शिक्षा के साथ ही उनका जीवन भी बदहाली में बीत रहा है।
कालाकांकर विकास क्षेत्र के जनवामऊ स्थित कस्तूरबा आरासीय बालिका विद्यालय में 100 बालिकाएं रजिस्टर्ड हैं। इसमें वार्डन समेत 7 अध्यापक व तीन तीन लिपिक तैनात हैं। बालिकाओ से पता चला कि मेन्यू के हिसाब से सुबह दूध नहीं मिलता। एक ही बिस्तर में तीन बालिकाओं को सोना पड़ता है। रसोइयां होने के बाद भी बच्चे ही अपनी थाली धोते हैं। अध्यापकों में महज तीन ही मौजूद रहे। वार्डन के बारे मे पता चला कि वह आए दिन जिला कार्यालय ही रहती हैें। शिक्षकों ने बताया कि विद्यालय में महज तीन कुर्सी है।
क्लास में डेस्क पर ही बैठना पड़ता है। शौचालय की छतों से पानी टपकता है। फ र्श टूटी है और क्लास रूम के प्लास्टर उखड़कर गिरते रहते हैं। विद्यालय परिसर में आए दिन नहर का पानी भर जाता है। इससे आने जाने में भी भारी दिक्कतें आती हैं। विद्यालय की वार्डेन मधूलिका ने फोन पर बताया कि दूध दिया जाता है। इस संदर्भ में डीपीसी सरोज सिंह ने बताया कि विद्यालय के भवन की हालत बेहद दयनीय है। आवासीय कमरों में खिड़की दरवाजे टूटे पड़े हैं। इसकी जानकारी बीएसए को दी गई है।