प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान की तर्ज पर भारत सरकार द्वारा अस्पतालों की सफाई के लिए चलाया गई एनआरएचएम की कायाकल्प योजना में संसाधन और धन की बर्बादी जिला अस्पताल में देखने को मिली। बुधवार को एनआरएचएम भारत सरकार की ओर से जिला अस्पताल का निरीक्षण करने आई तीन सदस्यीय टीम ने जब एक-एक चीजों को खंगालना शुरू किया तो सारी हकीकत सामने आ गई। टीम के इंचार्ज आरएस चौरसिया को कहना पड़ा कि हैरानी इस बात की हो रही है कि मिशन ने सब कुछ दे रखा है। धन और संसाधन की कमी नहीं है। इसका दुरुपयोग किया जाना ठीक नहीं है। इन सबके लिए सीएमएस जिम्मेदार हैं। वे बीमार अस्पताल की रिपोर्ट बनाकर भारत सरकार को सौंपेगे। निरीक्षण से हड़कंप मचा रहा। निरीक्षण इतनी बारीकी से किया जा रहा था कि कोई भी डॉक्टर टीम के साथ ज्यादा देर तक टिक नहीं सका। लोग पीछा छुड़ाते रहे।
दरअसल, प्रधानमंत्री ने अस्पतालों को भी स्वच्छता अभियान से जोड़ दिया है। इसको नाम दिया है कायाकल्प। इसका उद्देश्य है कि अस्पताल में गंदगी न हो। जो भी धन और संसाधन मुहैया कराए गए हैं उनका अच्छे से उपयोग हो। स्टाफ और कर्मचारी स्वच्छता से काम करें। उनको उपकरणों के संचालन के तौरतरीके मालूम हाें। जिससे इन सबका लाभ मरीजों को मिल सके। कायाकल्प योजना से जुड़े तमाम बिंदुओं पर अमल हो रहा है कि नहीं, इसकी पड़ताल करने के लिए एनआरएचएम ने टीमें गठित की हैं। टीमें अस्पताल में जाकर योजनाओं, संसाधनों और धन की उपयोगिता की हकीकत खंगाल रही हैं। इसी क्रम में मिशन की तीन सदस्यीय टीम बुधवार को आरसी चौरसिया की अगुवाई में जिला अस्पताल आई थी। संसाधनों का सही इस्तेमाल न होने से टीम को झटका लगा।
एक्स-रे से लेकर वार्ड तक कुपोषण से लेकर पैथालाजी तक कर्मचारी और स्टाफ बिना एप्रेन और हैंडगल्ब्स के काम करते दिखे। नर्सों ने सिर में टोपी नहीं लगाई गई थी। फर्श पर झाडू और पोछा नहीं किया गया था। मशीनों और उपकरणों का रखरखाव सही नहीं मिला। इसका इस्तेमाल और सफाई कैसे की जाती है, लोगों को पता नहीं था। जहां फिनायल की जरूरत है, वहां पर ब्लीचिंग पाउडर या फिर पानी से सफाई और धुलाई की बात टीम के सामने आई। इससे टीम ने माथा पकड़ लिया। हालांकि टीम को कुछ काम अच्छा भी लगा। कुपोषण वार्ड, एक्सरे कक्ष, इंजेक्शन ट्राली और लाउंड्री की तारीफ भी की। निरीक्षण के दौरान डॉक्टर पीएस मिश्रा, एसके तिवारी और डीपीएम कंचन बाला रहीं। निरीक्षण के बाद अमर उजाला से बातचीत में इंचार्ज आरएस चौरसिया ने बताया कि जांच में कुछ चीजें अच्छी भी मिली हैं। धन और संसाधन का सही इस्तेमाल यहां पर नहीं दिखा है। इसके लिए मुख्य चिकित्साधीक्षक जिम्मेदार हैं। वे इसकी रिपोर्ट बनाकर सरकार को भेजेंगे। सभी की फोटोग्राफी कराई गई है। इस बारे में प्रभारी सीएमएस डॉक्टर पीएस मिश्रा का कहना है कि वे तो इंचार्ज हैं। सही जानकारी सीएमएस डॉक्टर आरडी द्विवेदी के आने के बाद ही मिल पाएगी।