डॉ. राममनोहर लोहिया समग्र गांवों के चयन में पूरी तरह विधायकों की मर्जी चलेगी। न कोई मानक निर्धारित किया गया है और न ही कोई सर्वे होना है। विधायकों की संस्तुति ही चयन का आधार बनेगी। इधर, नवनिर्वाचित प्रधान अपने गांव को लोहिया गांव घोषित कराने के लिए विकास भवन की परिक्रमा कर रहे हैं।
वित्तीयवर्ष 2016-17 के लिए जिले के 37 गांवों को डॉ. राम मनोहर लोहिया समग्र गांवों के तहत चयनित किया जाना है। लोहिया समग्र गांवों का चयन करने के बाद गांव के सभी पात्रों को योजनाओं से लाभान्वित किया जाता है। लोहिया समग्र गांवों में आवास, पेंशन, नाली, आरसीसी सड़क निर्माण देखकर गांव के नवनिर्वाचित प्रधानों में अपने गांव को लोहिया समग्र गांव घोषित कराने की होड़ मची है। विकास भवन की परिक्रमा करने वाले प्रधान कभी अधिकारियों पर नेताओं का दबाव बना रहे हैं, तो कभी पटल के बाबू को पटाने में जुटे हुए हैं। मगर, शासनादेश सबसे बड़ी बाधा बनकर खड़ा हो गया है। जिसमें स्पष्ट कहा गया है कि क्षेत्रीय विधायकों की संस्तुति पर ही लोहिया समग्र गांवों का चयन किया जाए। शासन की इस पहल से प्रधानों को बड़ा झटका लगा है।
प्रधानों की मानें तो क्षेत्रीय विधायक भी प्रधानों की हां में हां तो मिला रहे हैं, मगर वह चयन किसी और का कर रहे हैं। इस योजना में तहसील और ब्लाक की कोई सीमा नहीं है। एक ब्लाक में कई गांवों को लोहिया समग्र गांव घोषित किया जा सकता है। वर्ष 2015-16 में कुंडा ब्लाक के पांच गांव और पट्टी ब्लाक, रामपुर संग्रामगढ़ ब्लाक के एक भी गांव का चयन नहीं किया गया था। फिलहाल वर्ष 2016-17 के लिए जल्द ही लोहिया समग्र गांवों का चयन किया जाएगा। प्रभारी परियोजना निदेशक और डीडीओ रमाकांत तिवारी ने बताया कि प्रभारी मंत्री की बैठक में लोहिया समग्र गांवों को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।