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साइकिल से पांच लाख किमी यात्रा कर दिया विश्व शांति का संदेश

Tue, 05 Jan 2016 11:28 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
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 न दिन का पता न रात का ठिकाना। साइकिल वाहन है और उसी पर पूरी गृहस्थी। पीछे की सीट पर एक बड़े बैग में तंबू, बर्तन के साथ साइकिल में हवा भरने के लिए पंप, पिलास और पंचर बनाने का सामान। आगे बड़ा केशरिया ध्वज। बस इसी के सहारे वह पिछले 27 सालों में पांच लाख किमी की यात्रा कर चुके हैं। मकसद सिर्फ एक विश्व शांति का संदेश। 56 साल के राजेंद्र अपने इसी मकसद से साइकिल लेकर देशभर में निकल पड़ते हैं। मंगलवार को वह बेल्हा पहुंचे तो लोगों ने उनका दिल से स्वागत किया। वह हर दिन 80 से 100 किमी साइकिल चलाते हैं। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनका हौसला और जज्बा देखकर लोग दंग रह गए। वह अब तक भटिंडा से साइकिल से ही 103 बार वैष्णो देवी और 12 अमरनाथ की यात्रा कर चुके हैं।
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पंजाब प्रांत के भटिंडा के मोहल्ला अमरीक सिंह रोड सुभाष गली निवासी राजेंद्र गुप्ता पहली बार वर्ष 1989 में विश्व शांति का संदेश देने के लिए साइकिल लेकर निकले। धीरे-धीरे वह चलते गए। उनकी हिम्मत को देखकर अब उन्हें अमरनाथ साइन बोर्ड और एक साइकिल कंपनी भी साइकिल की व्यवस्था करती है। पांच लाख किमी की यात्रा में वह 55 साइकिलें बदल चुके हैं।

उन्होंने यात्रा की शुरुआत अपने पैतृक जनपद भटिंडा से शुरू की थी। भटिंडा से वैष्णो देवी, कांगड़ा, हिमांचल प्रदेश, चंडीगढ़, हरिद्वार, गंगोत्री, अयोध्या के बाद काशी की धरती को नमन कर चुके हैं। काशी से वह साइकिल लेकर बेल्हा पहुंचे। यहां लोगों ने उन्हें हाथोंहाथ लिया। यहां से वह प्रयाग जाएंगे। वहां से गंगाजल लेकर फिर भटिंडा की यात्रा पर निकलेंगे। उनकी यात्रा का मकसद सिर्फ देश में लोगों से अमन-चैन कायम रखने की अपील करना है। साइकिल ही उनका चलता फिरता घर है। साइकिल में ही उनका बिस्तर बंधा रहता है। वह मंदिर या फिर बस्ती में कहीं रुक जाते हैं। वहां के लोग उनके संकल्प को सुनते ही खाने पीने का इंतजाम कर देते हैं। साइकिल में हवा भरने के अलावा मरम्मत का सामान भी अपने साथ रखते हैं।
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राजेंद्र गुप्ता को केंद्र सरकार ने अमरनाथ यात्रा पर जाने के लिए पास दिया है। ऐसा पास केवल उन्हीं को मिला है। वह बेरोकटोक अपनी साइकिल से अमरनाथ की यात्रा कभी भी कर सकते हैं।

भटिंडा निवासी राजेंद्र गुप्ता वकील के मुताबिक वह पहले पैदल ही वैष्णो देवी की यात्रा कर पूजन अर्चन किया करते थे। देश में शांति का संदेश पहुुंचाने के लिए उन्होंने मंदिर में मन्नत मांगी कि साइकिल मिल जाए तो वह पूरे देव स्थलों का दर्शन-पूजन कर शांति के लिए प्रार्थना करेंगे। कुछ ही दिनों में सबसे पहले हरियाणा की एक कंपनी ने उन्हें साइकिल उपलब्ध करा दी। हर साल कंपनी उन्हें नई साइकिल देती है।

राजेंद्र की मौजूदा समय में उम्र 56 साल है। देश में शांति के लिए यात्रा पर निकले राजेंद्र का बड़ा भाई अशोक कुमार है। माया मोह से दूर राजेंद्र ने शादी नहीं की। उसके बड़े भाई ने उसकी हिस्से की संपत्ति पर कब्जा कर लिया। भटिंडा में भी वह मंदिर में ही रहते हैं। यात्रा से लौटने के बाद जब भी घर जाते हैं तो शिवमंदिर में रुकते हैं। कुछ दिन रहने के बाद फिर अपनी मंजिल पर निकल पड़ते हैं।
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