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बजरंग धाम शिवमंदिर से लाखों की चोरी

Mon, 28 Dec 2015 11:18 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
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चिलबिला पुलिस चौकी से महज सौ कदम दूर शिवमंदिर का ताला तोड़कर चोर दान में मिले लाखों रुपये समेत अन्य कीमती सामान उठा ले गए। चोरों ने मौनी बाबा का मोबाइल भी उड़ा दिया। चोरी की खबर के बाद मौके पर पहुंचे भक्त आक्रोशित नजर आए।
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नगर कोतवाली के चिलबिला रेलवे स्टेशन के करीब ही शक्तिस्थल बजरंग धाम शिवमंदिर है। मंदिर के पुजारी मौनीबाबा कई वर्षों से मंदिर की देखभाल करते हैं। मंदिर से महज सौ कदम दूर चिलबिला पुलिस चौकी है। रविवार की रात अधिकारियों के आदेश को रद्दी की टोकरी में डालते हुए चिलबिला पुलिस सोती रही। पुलिस से बेखौफ आधा दर्जन चोर मंदिर मेें पहुंचे। भीतर घुसकर चोरों ने दानपात्र तोड़े ।

जिसमें लगभग ढाई लाख रुपये रहे होंगे। इसके अलावा बैग में रखा 25 हजार, बर्तन, मौनी बाबा के दो कीमती मोबाइल चोर समेट लिए। करीब एक घंटे तक चोरों ने मंदिर में उत्पात जारी रखा, लेकिन पुलिस को भनक तक नहीं लग सकी। आहट पाकर मौनी बाबा जाग गए, लेकिन असलहाधारी चोरों के भय से वह मौन साधे रहे। चोरों के जाने के बाद मौनी बाबा ने मंदिर में सो रहे दूसरे लोगोें को उठाया।
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इसके बाद मामले की जानकारी पुलिस को दी गई। घटना की जानकारी के बाद भी विलंब से पुलिस पहुंची और छानबीन के बाद चोरों की तलाश की बात कहते हुए चली गई। सोमवार की सुबह लोगों को घटना की जानकारी हुई। बड़ी संख्या में मंदिर पहुंचे भक्त पुलिस के रवैये पर आक्रोश जता रहे थे। मंदिर के पुजारी मौनी बाबा ने बताया कि दानपात्र में करीब दान के ढाई लाख रुपये थे। बैग में मिले रुपये समेत अन्य कीमती सामान भी चोर उठा ले गए। खबर भेजे जाने तक पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की थी।

शिवमंदिर बजरंग धाम में चोरी की घटना पहले भी हो चुकी है। मंदिर के पुजारी मौनी बाबा ने बताया कि चोर ठंड में ही चोरी की घटना को अंजाम देते हैं। तीन बार पहले भी चोरी की घटना हुई है। शिकायत के बाद भी पुलिस मंदिर के सुरक्षा के प्रति लापरवाह बनी रही।
चिलबिला स्थित शिवमंदिर में चोरी की घटना के बाद मंदिर के पुजारी मौनी बाबा काफी व्यथित दिखे। उन्होंने लिखकर भक्तों को बताया कि अब तो मंदिर छोड़कर चले जाने का मन करता है। ऐसी घटनाओं के बाद भी पुलिस का रवैया नकारात्मक रहा। वे चोरों को सामने आने पर पहचान सकते हैं। चोरी के दौरान इसलिए शोर नहीं मचाया कि असलहाधारी चोर उनकी जान भी ले लेते। उन्होंने बताया कि दानपात्र की रकम माघ मेला के दौरान वहां जाकर खर्च किया जाता रहा। ताकि भक्तों को किसी तरह की परेशानी न हो।
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