घर पर ही प्रसव कराने के फेर में महिला की जान चली गई। दायी के माध्यम से कराए गए प्रसव के कुछ देर बाद उसे रक्तस्राव होेने लगा। पहले तो घरेलू इलाज से ही उसे ठीक करने का प्रयास किया गया। बाद में रक्तस्राव अधिक होने पर परिजन उसे सीएचसी कुंडा ले जा रहे थे, लेकिन उसकी रास्ते में ही मौत हो गई। तमाम सरकारी सुविधाओं के बावजूद परिवार वालों द्वारा घर में ही प्रसव कराने की फैसले पर महिला को आखिर इसकी कीमत जान देकर चुकानी पड़ी। ऐसी गंभीर स्थितियों से निबटने के लिए सरकार द्वारा गांव-गांव में आशा कार्यकताओं की नियुक्ति की गई है लेकिन यहां आशा और एएनएम नदारद रहीं।
सवाल यह भी उठता है कि ऐसे गांव आशा और एएनएम महिलाओं का कितना ख्याल रख रही हैं। सीएचसी कुंडा के अंतर्गत समापुर गांव निवासी देवेश कुमार की पत्नी हिना (28) को सोमवार की रात प्रसव पीड़ा शुरू हुई तो गांव की एक दायी को बुला लिया गया। दायी ने भी प्रसव घर में ही किए जाने की सलाह दे दी।
इस पर परिजन घर में ही प्रसव कराने के लिए संतुष्ट हो गए। प्रसव होने के बाद उसे ब्लीडिंग होने लगी। दायी ने तमाम घरेलू नुस्खे के अनुसार हो रही ब्लीडिंग को रोकने की कोशिश की। इस चक्कर में महिला का काफी खून बह गया। जब वह बेहोश हो गई तो परिजनों के होश उड़ गए। उसे आनन-फानन में परिजन लेकर कुंडा सीएचसी भागे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। सीएचसी में चिकित्सकों ने उसकी जांच की और मृत घोषित कर दिया। भोर में ही परिजन उसका शव घर उठा ले गए। इस बारे में सीएचसी अधीक्षक रावेंद्र सिंह ने बताया कि उन्होंने संबंधित एएनएम व आशा से इसका लिखित जवाब मांगा है। महिला को प्रसव दर्द हुआ तो वह उसे लेकर अस्पताल क्यों नहीं आईं।