पछुवा हवाओं के चलने से आसमान पूरी तरह साफ रहा। कहीं कोहरे का नामोनिशान नहीं था। दिन में धूप भी खिली, लेकिन लोगों को ठंड से निजात नहीं मिली। बाहर धूप में बैठने पर लोगों को कुछ राहत जरूर मिली, लेकिन घरों में जाते ही गलन से बुरा हाल हो जाता। सर्दी का सबसे अधिक असर भोर में और शाम के वक्त हो रहा है।
लगातार बर्फीली हवाओं के चलने के कारण रविवार भोर में न्यूनतम तापमान 2.2 पर पहुंच गया, जबकि अधिकतम तापमान 22.4 डिग्री दर्ज किया गया। शनिवार को न्यूनतम पारा 3.0 और अधिकतम 22.8 था। सुबह तड़के काम से निकलने वाले लोग ठंड से कांपते रहे। रविवार को हाड़ कपाने वाली ठंड ने इस सीजन का रिकार्ड तोड़ दिया। इस सीजन का सबसे ठंडा दिन रविवार रहा। अधिकतम पारा में मामूली अंतर दर्ज किया गया है। मौसम वैज्ञानिक देशराज मीना ने बताया कि अगर पछुवा हवाएं नहीं थमीं तो ठंड और बढ़ सकती है। उधर, दिन-रात के तापमान में भारी अंतर से लोग सर्दी और बुखार की चपेट में आ रहे हैं। ज्यादा असर बच्चों पर हो रहा है।
जकड़न के चलते उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही है। जिला अस्पताल के साथ प्राइवेट अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड इन दिनों फुल हैं। जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल गुप्ता का कहना है कि सर्दी बहुत तेज है। ऐसे में छोटे बच्चों का विशेष ख्याल रखने की जरूरत है। जरा सी भी लापरवाही भारी पड़ सकती है।