प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री शंखलाल माझी को औचक निरीक्षण के दौरान जिले के कोहड़ौर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जबरदस्त खामियां मिलीं। करीब एक बजे अस्पताल पहुंचे मंत्री ने लगातार तीन घंटे तक एक-एक दवा का मुआयना किया। दवा के स्टाक से लेकर ओपीडी तक की स्थिति बेहद खराब मिली। नाराज मंत्री ने कहा कि वह किसी को नहीं छोड़ेंगे। सब की मिलीभगत से दवाएं बेंची जा रही हैं।
स्वास्थ्य मंत्री पहुंचे तो अस्पताल में एक भी कर्मचारी मौजूद नहीं था। वह करीब 15 से 20 मिनट तक अकेले सीएचसी परिसर और कक्ष के अंदर बाहर घूमते रहे। खबर मिलने के बाद फार्मासिस्ट और चिकित्सक भी भाग कर मौके पर पहुंचे। इन कर्मियों के पहुंचने पर मंत्री ने सबसे पहले दवाओं के स्टाक का निरीक्षण किया। पाया कि ‘सिप्रो फ्लाक्सिन-500’ नामक दवा रजिस्टर पर दर्ज स्टाक से ज्यादा थी। वितरण रजिस्टर में दवा का स्टाक ज्यादा और रजिस्टर पर कम मिला। अधिकांश दवाएं स्टोर कक्ष में न होकर अस्पताल के दूसरे कमरे में गट्ठर बना कर रखी गई थीं।
जेएसवाई (जननी सुरक्षा योजना) का वितरित चेक रजिस्टर कर्मी मंत्री को नहीं दिखा सके। प्रसव कक्ष में गंदगी देख मंत्री बिफर पड़े। उपस्थिति पंजिका के निरीक्षण में पाया कि डॉ भाव 10 व 11 अप्रैल को नहीं आईं। रजिस्टर पर अनुपस्थित या अवकाश दर्ज नहीं था। नेत्र सहायक प्रशांत की सीएल तो चढ़ी पर उनका प्रार्थना पत्र नहीं था। करीब घंटे भर बाद पहुंचे सीएचसी अधीक्षक भरत पाठक को मंत्री ने कड़ी फटकार लगाई। नाराज स्वास्थ्य मंत्री ने कहा वह सभी पर कार्रवाई करेंगे। उनके साथ डिप्टी सीएमओ एम नारायण भी थे।