लालगंज कोतवाली की रानीगंज कैथौला पुलिस चौकी के जर्जर भवन में जान हथेली पर रखकर पुलिस वालों को नौकरी करनी पड़ रही है। शौचालय और रसोई घर की समस्या के चलते कर्मचारियों को हलाकान होना पड़ता है। सांगीपुर के घुइसरनाथधाम में बनी पुलिस चौकी में पुलिसकर्मियों की कमी के चलते ताला लटक गया है।
जिले की सबसे बड़ी कोतवाली लालगंज के चार दर्जन से अधिक गांवों में सुरक्षा संभालने की जिम्मेदारी रानीगंज कैथौला पुलिस चौकी पर है। किराये के जर्जर भवन में दो दशकों से चल रही इस चौकी में नौकरी करने वाले दरोगा व सिपाही जान हथेली पर रखकर रहते हैं। चौकी का भवन इस कदर जर्जर हो चुका है कि कई जगह इसमें चौड़ी दरारें पड़ चुकी हैं। भीतर प्लास्टर नही होने से ईंट के टुकड़े दिनभर पुलिसकर्मियों व कागजात पर गिरते रहते हैं। भवन कब भरभराकर जमींदोज हो जाए, इसका कोई भरोसा नहीं रह गया है। किसी थाने से कम का दर्जा नहीं रखने वाली रानीगंज कैथौला पुलिस चौकी में जर्जर भवन के साथ ही समस्याओं का अंबार लगा हुआ है।
यहां खाना बनाने के लिए न तो रसोई घर है और न ही नहाने के लिए शौचालय की व्यवस्था है। बहुत पहले ग्राम पंचायत से पुलिसकर्मियों ने जुगाड़ कर शौचालय की व्यवस्था कर रखी थी। जो अब खस्ताहाल हो चला है। दरवाजे टूटकर गिर चुके हैं। खिड़कियां सड़कर टूट चुकी हैं। कोई जानवर आदि चौकी में न घुस जाएं, इसलिए पीछे की ओर ईंट व पत्थरों को रखकर अस्थाई दीवार बना दी गई है। पॉलीथिन तानकर पुलिस के लिए दो जून की रोटी का इंतजाम होता है। शौच करने के लिए पुलिसकर्मी मैदान की ओर जाते हैं और स्नान के लिए उन्हें खुले परिसर का इस्तेमाल करना पड़ता है। दरवाजे के अभाव में सिपाही व दरोगा सरकारी असलहों के साथ बेचैनी में रात बिताते हैं।
उन्हें डर बना रहता है कि असलहा चोरी हुआ तो उनकी नौकरी भी खतरे में पड़ जाएगी। उधर, सांगीपुर थाना क्षेत्र के घुइसरनाथधाम मंदिर की सुरक्षा व श्रद्धालुओं की देखरेख के लिए यहां चौकी की स्थापना की गई है। यहां स्टाफ की कमी ही सबसे बड़ी समस्या के रूप में सामने आ गई है। कहने को तो दरोगा व दो सिपाहियों को तैनात किया गया है। दिन में कुछ देर के लिए वह यहां आते भी हैं लेकिन समस्याओं के अंबार के चलते रात में सांगीपुर थाने चले जाते हैं। यहां न तो रसोईघर है और न ही शौचालय की व्यवस्था है। बिजली व पानी के लिए भी पुलिस कर्मियाें को परेशान होना पड़ता है। समस्याओं के चलते जो पुलिस कर्मी यहां तैनात किए गए हैं वह दिनभर मंदिर में सुरक्षा व्यवस्था का इंतजाम चाक चौबंद करने के बाद थाने में रहने व खाने चले जाते हैं। दिनरात जनता के सुरक्षा व अन्य कार्यों में व्यस्त रहने वाले पुलिस चौकी पर तैनात सिपाहियों की हालत बदतर हो चली है। कोई भी अधिकारी इनकी सुध लेने को तैयार नही है।