ठंड शुरू हो गई है। ऐसे में रोडवेज बसों में सफर करने वाले यात्री परेशान हो रहे हैं। ज्यादातर बसों में खिड़की के पास लगे शीशे टूट गए हैं। विभाग अभी अनजान बना हुआ है। शीशा न होने के चलते सफर करते समय यात्रियों को ठंड लगती है। इससे वे बेहद परेशान हैं। ऐसे में लोग रोडवेज बसों की बजाए प्राइवेट बसों से सफर करना ज्यादा मुनासिब समझ रहे हैं।
शीतलहर के साथ सुबह शाम कड़ाके की ठंड पड़नी शुरू हो गई है। ऐसे में अभी तक रोडवेज विभाग ने यात्रियों के सफर के दौरान उन्हें ठंड से बचाने के लिए कोई कवायद नहीं की। ज्यादातर बसों की खिड़कियां और शीशे टूटे हुए हैं। आम दिनों में तो यात्रियों को किसी प्रकार की दिक्कत नहीं हो रही थी, मगर ठंड शुरू होती ही वे परेशान होने लगे हैं। इन दिनों पड़ रहे घने कोहरे के साथ कड़ाके की ठंड लोगों को सफर में दिक्कत आ रही है। सफर के दौरान हवा के चलते लोग खिड़की के पास बैठना पसंद नहीं कर रहे हैं।
ऐसे में एक ओर जहां विभाग का घाटा हो रहा है वहीं दूसरी ओर ठंड लगने से यात्री घर पहुंचते-पहुंचते बीमार हो जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि विभागीय अधिकारियों को कम से कम अस्थाई रूप से ही कोई व्यवस्था तो तत्काल करनी चाहिए। अन्यथा यात्री ठंड की चपेट में आते ही रहेंगे। अभी तो सर्दी का मौसम शुरू ही हुआ है।
आने वाले लगभग दो महीने तक सर्दी का ऐसा ही सितम जारी रह सकता है। विभाग की इस उदासीनता के चलते ज्यादातर मुसाफिर प्राइवेट वाहनों से सफर करने को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसके बाद भी जिम्मेदारों का ध्यान इस ओर नहीं पड़ रहा है। जबकि हर वर्ष मरम्मत के नाम पर लाखों रुपये विभाग को मिलते हैं। इसके बाद भी बसों की मरम्मत नहीं हो पाती है।