माह भर पहले आए तूफान में टूटे बिजली के खंभों को विभाग अब तक नहीं बदल सका। बिजली विभाग पोल बदलने के लिए ग्रामीणों से पैसे मांग रहा है। जिससे सैकड़ों गांवों के लोग अंधेरे में गुजर-बसर कर रहे हैं। जबकि सर्वे में यह साफ हो चुका है कि किन स्थानों पर कितने पोल टूटे हैं। बिजली न मिलने से परेशान लोग विभाग के चक्कर काट रहे हैं। अधिकारी हैं कि उनकी सुन नहीं रहे हैं। इससे हजारों उपभोक्ता बिन बिजली इस उमस भरी गर्मी में परेशान हैं।
बारिश के साथ करीब एक माह पहले आए तूफान में गेहूं की फसल बर्बाद हो गई थी। तेज हवा के कारण बिजली के पोल उखड़ गए। पोल टूटने के कारण बिजली की आपूर्ति ठप हो गई। सप्लाई बाधित होने से सैकड़ों गांवों में अंधेरा छा गया। बिजली के अभाव में लोगों के घर लगे कूलर व पंखा ही नहीं वल्ब भी बेकार हो गए। उन गांवों के हजारों लोगों को ढिबरी व मोमबत्ती की रोशनी में रात बिताने की मजबूरी हो गई। ग्रामीणों की पहल पर विभाग खामोश बैठा रहा। दबाव बढ़ा तो टूटे हुए बिजली खंभों की जांच कराई गई। सर्वे में पाया गया कि जिले भर में 300 से अधिक बिजली के पोल टूटे हैं। शहर के टूटे एक-दो पोल तो विभाग ने बदल दिए। मगर ग्रामीण क्षेत्र के टूटे खंभे अब तक नहीं बदले जा सके। जबकि विभाग को यह अच्छी तरह पता है कि पोल किस उपकेन्द्र के अंतर्गत कौन से फीडर पर और कहां टूटा है। सदर तहसील के मझगवां स्थित चौबेपुर गांव में छह पोल टूटे हैं। ग्रामीण शिकायत करके थक चुके हैं। अब वे धरना-प्रदर्शन करने की तैयारी में हैं।