अधिवक्ता इंद्रमणि शुक्ला की हत्या के आरोपियों को जेल के सींखचों के पीछे पहुंचाने के बाद एसटीएफ इंस्पेक्टर अनिल के असल साजिशकर्ताओं की तलाश में निकल पड़ी है। चर्चा है कि इस हत्याकांड में उसकी जांच के रडार पर कुछ खाकी वाले भी हो सकते हैं। हालांकि फौरी तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। अगर जांच ने सही दिशा पकड़ी तो कइयाें की गर्दन एसटीएफ की गिरफ्त में होगी। जांच की आंच में कौन झुलसेगा, यह तो भविष्य के गर्त में छिपा है। मगर प्रारंभिक जांच में एसटीएफ के हाथ जो साक्ष्य लगने की चर्चा है, उससे लग रहा है कि आने वाले समय में कइयों के चेहरे बेनकाब होंगे। जिनमें पुलिस वाले भी हो सकते हैं।
अधिवक्ता इंद्रमणि की हत्या की साजिश के मामले में महरूल निशा को जेल भेजने के बाद से ही इंस्पेक्टर अनिल कुमार को असल आरोपियों का सुराग लग गया था। साथ ही उनको संरक्षण देने वाले तथाकथित खाकी वालों के चेहरे भी सामने आ गए थे। इसका खुलासा होने से पहले ही कोतवाल अनिल को निलंबित कर दिया गया। बाद में साजिश के तहत उनकी हत्या भी कर दी गई। हत्या के बाद मामले की जांच एसटीएफ इलाहाबाद को सौंपी गई।
एसटीएफ ने सबसे पहले इंद्रमणि शुक्ला हत्याकांड के शूटरों को पकड़ा। मामले को अनिल हत्याकांड की कड़ी से जोड़ा तो एसटीएफ के हाथ काफी चौंकाने वाले सुराग लगे हैं। जांच जिस दिशा में घूमी है, उससे पता चला है कि अनिल की जिस तरह से गोली मारी गई है वह पूरा मामला ही संदिग्ध नजर आ रहा है। हालांकि एसटीएफ जांच कर रही है। चर्चा है कि जांच के बाद खुलासे के भय से कई लोग बहाना बनाकर पलायन करने के चक्कर में हैं। वे इसकी तैयारी करने में जुट गए हैं। चर्चा है कि जांच पूरी होते ही सभी आरोपियों पर शिकंजा कसने मेें देर नहीं लगेगी।