हर रोज खून की होली खेल रहे कातिलों व छिनैती और चोरी करने वालों की दहशत से जिले के लोग सहम गए हैं। कदम-दर-कदम पुलिस पर भारी पड़ रहे अपराधी एसपी की पुलिसिंग को खुला चैलेंज दे रहें हैं। कातिलों व बदमाशों को पकड़ने के नाम पर पुलिस केवल लकीर पीट रही है। अपराध पर अंकुश लगाने में विफल जनपद की पुलिस पर डीएम तक शिकंजा नहीं कस पा रहे। बेलगाम हुई पुलिस को देख अपराधियों के उत्पात ने लोगों को घर से लेकर सड़क तक असुरक्षा की भावना पैदा कर रखी है।
अभिलेखों में रिपोर्ट न दर्ज कर पुलिस अपराध का ग्राफ भले घटा रही हो पर हकीकत यह है कि जिले में गुनाह का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। लोगों को सुरक्षा देने के नाम पर पुलिस केवल गाल बजा रही है। हथिगवां थाना क्षेत्र में 2/3 मार्च 2013 की रात बलीपुर के प्रधान नन्हें यादव व उसके भाई सुरेश यादव के साथ ही सीओ कुंडा जियाउल हक की हत्या कर दी गई थी। दुस्साहस भरी इस घटना को लोग भुले भी नहीं थे कि स्टेशन के करीब महुआर के फिरोज व एजाज की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। अंतू थाना क्षेत्र के जैतीपुर कठार में रहने वाले दो सगे भाइयों की नृशंस हत्या की हो गई थी। अधिवक्ता राजदत्त मिश्र व प्रभाकर सिंह मीनू की गोली मारकर हत्या कर हत्यारे पुलिस को चुनौती देते हुए फरार हो गए थे। इसके अलावा लूट, छिनैती व बाइक चोरी की अनगिनत घटनाएं हुईं।
इससे जनपद के लोगों का कानून से भरोसा उठने लगा। इस बीच जगद्गुरू कृपालू महराज की तेरहवीं कार्यक्रम में 27 नवंबर 2013 को शामिल होने के लिए सूबे के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव आए। भक्तिधाम मनगढ़ में पत्रकारों ने सीएम से जनपद की चरमराई कानून व्यवस्था को लेकर सवाल दागे। मीडिया के सवालों से भन्नाए मुख्यमंत्री ने तत्कालीन जिलाधिकारी विद्याभूषण व पुलिस अधीक्षक एलआर कुमार को तलब कर लिया। अधिकारियों से पूछा कि कानून व्यवस्था क्यूं खराब है। सीएम के तेवर से अधिकारी सहमे रहे। उसी दिन से अपराधियों पर नकेल पुलिस कसने लगी थी। पूर्व पुलिस अधीक्षक अनंतदेव के समय में भयाक्रांत रहने वाले अपराधी मौजूदा समय में बेलगाम हो गए हैं।