श्रमिकों का आसू पोंछने के लिए अफसर पग-पग पर खड़े मिलेंगे। काम करते समय किसी की दुर्घटना में मृत्यु होने पर परिजनों को पांच लाख रुपये, आंशिक विकलांगता पर दो लाख और स्थायी रूप से विकलांग होने पर प्रत्येक मजदूर को अहेतुक सहायता के रूप में तीन-तीन लाख रुपये मिलेंगे। मगर इसके लिए श्रमिकों को जिला श्रम कार्यालय में रजिस्ट्रेशन कराना होगा।
श्रमिकों के कल्याण के लिए शासन से अनेक योजनाएं चल रही हैं, मगर इसकी जानकारी प्रत्येक श्रमिक मजदूर को नहीं होने के कारण इसका लाभ नहीं उठा पाते हैं। जिला श्रम कार्यालय में ऐसे मजदूर ही अपना पंजीकरण करा सकते हैं, जिन्होंने 90 दिनों तक श्रमिक निर्माण के रूप में कार्य किया है, या जिन्होंने मनरेगा में पचास दिनों तक मजदूरी की है। पंजीकरण कराने वाले श्रमिकों के लिए महत्वपूर्ण योजनाओं में दुर्घटना सहायता योजना शामिल है। इस योजना के तहत किसी भी श्रमिक की मृत्यु होने पर पांच लाख, आंशिक अपंगता पर दो लाख और स्थायी रूप से विकलांग होने पर तीन लाख रुपये की अहेतुक सहायता दी जा रही है।
यही नहीं, श्रमिक मजदूरों को पक्की छत मुहैया कराने के लिए दो किश्तों में एक लाख रुपये और घर मरम्मत के लिए 15,000 रुपये प्रदान किए जाते हैं। मगर इन योजनाओं का लाभ सिर्फ पंजीकृत श्रमिकों को ही मिल सकता है। मजदूरों के आने-जाने में कोई दिक्कत न हो, इसके लिए साइकिल योजना भी चल रही है। प्रति श्रमिक को तीन हजार रुपये साइकिल खरीदने के लिए दिए जाते हैं। पंजीकृत श्रमिकों की उम्र साठ वर्ष होने पर उन्हें पांच सौ रुपये प्रतिमाह पेंशन दी जाती है। सीडीओ महेंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि श्रमिक कल्याण के लिए अनेक योजनाएं चल रही हैं, मगर यह सब पंजीकृत मजदूरों के लिए ही हैं। इसलिए अधिक से अधिक श्रमिकों को अपना रजिस्ट्रेशन कराना चाहिए।