प्रतापगढ़। पुलिस इंस्पेक्टर अनिल कुमार की हत्या के दो आरोपियों को रातभर दबिश के बाद पुलिस ने धर दबोचा। उनके कब्जे से घटना में प्रयुक्त तीन तमंचा, कारतूस और बाइक बरामद हुई। पुलिस अधीक्षक का दावा है कि मारपीट के दौरान भागते समय मारी गई गोली से इंस्पेक्टर की मौत हुई।
शुक्रवार को पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार सक्सेना ने इंस्पेक्टर अनिल कुमार की हत्या का खुलासा किया। बताया कि वैष्णवी होटल के ग्राउंड फ्लोर पर गुरुवार की रात मॉडल शाप में कई लोग मदिरा का सेवन कर रहे थे। बाइक की पार्किंग को लेकर दो गुट के युवकों के बीच कहासुनी होने लगी। विवाद बढ़ने के दौरान एक ओर से फायरिंग तो दूसरी ओर से शराब की बोतलें फेंकी जाने लगीं। साथियों की मदद में दौड़े अभिषेक को गोली लगी।
फायर की आवाज सुनकर सीढ़ियों से नीचे उतर रहे इंस्पेक्टर अनिल कुमार के सीने में एक गोली लग गई। जिससे उनकी मौत हो गई। इंस्पेक्टर को गोली मारकर भागे राजू सोनी उर्फ बोचा पुत्र पंचू सोनी निवासी राजापाल टंकी और जीशान पुत्र शाहिद निवासी पल्टन बाजार को रात में ही धर दबोचा गया। उनके पास से तीन तमंचा, बाइक, कारतूस बरामद हुआ। दोनों ने गोली मारने का जुर्म कबूला है।
गोलीबारी करने वाले बोचा व जीशान का मॉडल शाप में बैठे शराब पी रहे अभिषेक, किशन उर्फ राजकुंवर पुत्र राजेंद्र बहादुर निवासी पूरे केशवराय, हिमांशू उर्फ अभिषेक सिंह पुत्र राजेंद्र निवासी पूरे केशवराय, शिन्टू उर्फ स्वतंत्र कुमार सिंह पुत्र हरदेव निवासी पूरे केशवराय और शेरू उर्फ शक्ति सिंह पुत्र मानसिंह निवासी पूरे केशवराय से विवाद हुआ था। अभिषेक के सभी साथियों को भी हिरासत में ले लिया गया है।
इस घटना में मृतक इंस्पेक्टर के भाई विनोद की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया था। अभिषेक की तहरीर पर भी रिपोर्ट दर्ज हुई है। जीशान के ऊपर जानलेवा हमले की रिपोर्ट पहले नगर कोतवाली में दर्ज है। आरोपियों को दबोचने के लिए नगर कोतवाल हरिपाल सिंह यादव संग स्वाट टीम प्रभारी मनोज शुक्ला, आरक्षी विनोद दुबे, जमशेद खान, अजय शुक्ला, अनिल सिंह समेत कई थानेदार रात भर ताबड़तोड़ दबिश देते रहे।
पूर्व नगर कोतवाल अनिल कुमार की हत्या की खबर मिलने के बाद उल्टे पैर आईजी व डीआईजी को लौटना पड़ा। कई थानेदारों को नगर कोतवाली बुलाने के बाद हत्यारों को दबोचने के लिए रणनीति बनाई गई। अलग-अलग टीमों को संदिग्ध बदमाशों की तलाश में भेजा गया ताकि हत्यारे भागने में कामयाब न हो सकें। रात में हत्यारों के पकड़े जाने और उनसे पूछताछ के बाद ही आईजी और डीआईजी इलाहाबाद के लिए रवाना हुए।
बदमाशों की गोली से लहूलुहान इंस्पेक्टर अनिल कुमार को जिला अस्पताल लाने वालों को आईजी बीबी शर्मा खोजते रहे। हालांकि बाद में इंस्पेक्टर के साथी नरदेश्वर से बात करने के बाद अस्पताल आने वाले युवक भी पुलिस को मिल गए। उन्होंने घटना की विस्तृत जानकारी दी।
इंस्पेक्टर अनिल कुमार की हत्या के बाद जिला अस्पताल पहुुंचे आईजी बीबी शर्मा के सामने अधिवक्ताओं का गुस्सा फूट गया। वे पूर्व नगर कोतवाल के व्यवहार की चर्चा करते हुए गत दिनों हुई कार्रवाई के लिए पुलिस अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराने लगे। वकीलों ने कहा कि आईजी साहब जब कानून के रखवालों का यह हाल है तो दूसरों का क्या हाल होगा। बिना जवाब दिए आईजी वहां से कोतवाली आ गए। वहां पहुंचे इंस्पेक्टर के परिजनों का गुस्सा भी फूट पड़ा। बोले कि कातिलों को पूरा पुलिस महकमा जानता है। परिजनों ने अधिकारियों की मौजूदगी में विभाग को ही घटना का जिम्मेदार ठहराया। हालांकि बाद में पुलिसकर्मियों ने सभी को समझाबुझाकर शांत कराया।